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मॉनसून में नहीं मिली राहत: आलू, प्याज और टमाटर के थोक दामों में भारी गिरावट, किसानों को हो रहा नुकसान

मॉनसून सीजन में देश की प्रमुख मंडियों से आई रिपोर्ट किसानों के लिए राहत भरी नहीं रही है। आलू, प्याज और टमाटर जैसे आवश्यक सब्जियों की थोक कीमतों में बीते एक साल के मुकाबले भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे किसानों की कमाई पर सीधा असर पड़ा है। जबकि आमतौर पर बरसात के महीनों में इन सब्जियों के दाम बढ़ने की उम्मीद रहती है, इस बार तस्वीर कुछ और ही बयां कर रही है। कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 14 जुलाई 2025 को देशभर की प्रमुख मंडियों में प्याज की औसत थोक कीमत 1380.82 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज की गई, जो कि पिछले साल इसी तारीख पर 2627.45 रुपये थी। यानी एक साल में प्याज की कीमतों में करीब 47.44 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। आलू की कीमतें भी इस गिरावट की चपेट में रही हैं। इस साल आलू का औसत थोक मूल्य 1410.81 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जो पिछले वर्ष 2278.71 रुपये था। यानी 38.08 फीसदी की गिरावट।

टमाटर की कीमतों में भी जोरदार गिरावट देखने को मिली है। टमाटर की औसत थोक कीमत 2325.29 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गई है, जबकि एक साल पहले यह 4074.49 रुपये प्रति क्विंटल थी। यानी कीमतों में लगभग 42.93 प्रतिशत की गिरावट हुई है। मौसम की मार और बंपर फसल के चलते किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। खासतौर पर प्याज की बात करें तो रबी सीजन में भारी मात्रा में बुवाई और बेहतर उत्पादन ने बाजार में अत्यधिक आपूर्ति कर दी, जिसके चलते थोक दाम लगातार नीचे रहे। टमाटर की कीमतों में भी कुछ महीनों तक भारी गिरावट रही, जब थोक मंडियों में यह 10 रुपये प्रति किलो से भी नीचे बिकता रहा। फिलहाल इसमें थोड़ी रिकवरी हुई है, लेकिन कीमतें अब भी पिछले साल के मुकाबले काफी कम हैं।

दूसरी ओर खुदरा बाजार में इन सब्जियों के दाम अपेक्षाकृत ऊंचे बने हुए हैं। उपभोक्ता अभी भी इन उत्पादों को बाजार से महंगे दामों पर खरीद रहे हैं, लेकिन किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। यह स्थिति न केवल किसानों के लिए चिंता का विषय है, बल्कि यह आपूर्ति श्रृंखला में मौजूद असंतुलन को भी उजागर करती है। अब जबकि त्योहारी सीजन धीरे-धीरे करीब आ रहा है, किसानों को उम्मीद है कि बाजार में मांग बढ़ेगी और कीमतों में थोड़ी तेजी आएगी। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि फसलों की लगातार अच्छी आवक बनी रही तो यह संभावना भी सीमित हो सकती है।

देश की अलग-अलग मंडियों में इन तीन प्रमुख सब्जियों के भावों में भी विविधता देखी जा रही है। जैसे महाराष्ट्र के कोल्हापुर में प्याज की अधिकतम कीमत 2000 रुपये प्रति क्विंटल रही, जबकि केरल के चेलक्करा में यह 3500 रुपये तक पहुंच गई। वहीं, आलू की सबसे अधिक कीमत मांजेश्वरम (केरल) में 4600 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज की गई, जबकि सोलन (हिमाचल प्रदेश) में यह महज 1500 रुपये रही। टमाटर की कीमतें केरल और महाराष्ट्र की मंडियों में अधिक रही हैं, जहां यह 4000 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर तक पहुंचा। इस गिरावट ने एक बार फिर किसानों की आय के संकट और बाजार तंत्र की खामियों को उजागर किया है। सरकार की तरफ से उत्पादन तो प्रोत्साहित किया जा रहा है, लेकिन कीमतों को स्थिर रखने और किसानों को बेहतर लाभ दिलाने की दिशा में ज़मीनी काम अब भी अधूरा दिखता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले त्योहारों और खरीफ सीजन में बाजार किस दिशा में जाता है और क्या किसान अपने उत्पाद का उचित मूल्य प्राप्त कर पाते हैं या नहीं।

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