Site icon Agriculture| Kheti| Krishi| Farm| Farmer| Agriculture| News

नासिक में प्याज की कीमत गिरने से किसान संकट में

Nasik onion farmers

नासिक: महाराष्ट्र के नासिक जिले में थोक बाजार में प्याज की कीमतों में भारी गिरावट ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रदेश के सबसे बड़े प्याज उत्पादक क्षेत्र में पांच लाख से अधिक किसान इस संकट से प्रभावित हुए हैं। कई किसान अपनी उपज लागत से भी कम दाम पर बेचने को मजबूर हैं, जबकि कुछ बेहतर कीमत की उम्मीद में फसल रोककर बैठे हैं।

लागत से कम दाम पर बिक रही फसल

जिले की 17 मंडियों में प्याज की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है, जिसमें एशिया की प्रमुख प्याज मंडी लासलगांव भी शामिल है। यहां थोक कीमतें 800 से 1000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच चल रही हैं, जबकि किसानों की उत्पादन लागत इससे कहीं अधिक है। किसानों का कहना है कि इस स्थिति में उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और कर्ज चुकाना भी मुश्किल हो गया है। कई किसान अपनी फसल को मंडी तक लाने से भी हिचक रहे हैं।

निर्यात में गिरावट से बढ़ी समस्या

विशेषज्ञों के अनुसार प्याज की कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण निर्यात में कमी है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण ईरान, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान जैसे देशों को होने वाला निर्यात लगभग ठप हो गया है। इससे घरेलू बाजार में अधिक आपूर्ति हो गई है और कीमतें गिर गई हैं।

घरेलू मांग में भी आई कमी

घरेलू स्तर पर भी प्याज की मांग में कमी देखी जा रही है। व्यावसायिक गैस की आपूर्ति में अनियमितता के कारण होटल और रेस्तरां का कामकाज प्रभावित हुआ है, जिससे खपत घट गई है। इसके अलावा बांग्लादेश द्वारा आयात में कमी आने से भी बाजार पर दबाव बढ़ा है।

बढ़ा माल ढुलाई खर्च

निर्यात में एक और बड़ी बाधा माल ढुलाई का बढ़ता खर्च है। शिपिंग चार्ज में भारी बढ़ोतरी होने के कारण निर्यात करना अब आर्थिक रूप से लाभदायक नहीं रह गया है। इससे व्यापारियों ने खरीद कम कर दी है, जिसका सीधा असर किसानों पर पड़ा है।

आवक में कमी, किसान कर रहे भंडारण

कीमतों में गिरावट के कारण लासलगांव मंडी में रोजाना आवक घटकर 13 से 14 हजार क्विंटल रह गई है, जबकि सामान्य दिनों में यह 30 हजार क्विंटल तक होती है। कई किसान अपनी फसल को भंडारण कर रहे हैं, ताकि भविष्य में बेहतर कीमत मिलने पर बेच सकें।

सरकार से राहत की उम्मीद

किसानों को उम्मीद है कि सरकारी एजेंसियां बफर स्टॉक बनाने के लिए जल्द ही प्याज की खरीद शुरू करेंगी। साथ ही राज्य सरकार से आर्थिक सहायता की मांग भी तेज हो गई है। किसान संगठनों का कहना है कि लगातार दूसरे साल संकट का सामना कर रहे किसानों को तत्काल राहत और सब्सिडी की जरूरत है, ताकि वे अपने कर्ज चुका सकें और खेती जारी रख सकें।

ये भी पढ़ें: बिहार में दलहन-तिलहन की खरीद शुरू, किसानों को मिलेगा एमएसपी का लाभ

Exit mobile version