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बिहार में मशरूम उत्पादन ने पकड़ी रफ्तार, तीन साल में इतनी बड़ी छलांग

Mushroom production in Bihar

पटना: बिहार में मशरूम उत्पादन को लेकर किसानों के बीच ज़बरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने बताया कि बिहार में मशरूम उत्पादन लगातार प्रगति की दिशा में आगे बढ़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में जहां बिहार का कुल मशरूम उत्पादन 35 हजार मीट्रिक टन था, वहीं 2023-24 में यह बढ़कर 42 हजार मीट्रिक टन हो गया। वर्ष 2024-25 में इसमें और तेजी आई है और उत्पादन 44 हजार 930 मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। कृषि मंत्री ने कहा कि यह वृद्धि बिहार की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था में मशरूम उत्पादन के बढ़ते महत्व और उज्ज्वल संभावनाओं को दर्शाती है। उन्होंने बताया कि देश के कुल मशरूम उत्पादन में बिहार का योगदान लगभग 12 प्रतिशत है, जिससे राज्य इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

मशरूम उत्पादन में आगे बढ़ रहा बिहार

कृषि मंत्री ने कहा कि बिहार सरकार द्वारा संचालित मशरूम उत्पादन योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के चलते इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। यह उपलब्धि किसानों की आय बढ़ाने, पोषण सुरक्षा को मजबूत करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में अहम मानी जा रही है। कम लागत, कम जमीन और अधिक आय देने वाली यह खेती अब बिहार की कृषि अर्थव्यवस्था का एक मजबूत और टिकाऊ विकल्प बनकर उभर रही है।

मशरूम की खेती के लिए मिल रही सब्सिडी

राम कृपाल यादव ने बताया कि योजना के तहत सब्सिडी, यूनिट स्थापना, प्रशिक्षण और कृषि विश्वविद्यालयों के तकनीकी सहयोग से किसानों और उद्यमियों को वैज्ञानिक पद्धति से मशरूम उत्पादन के लिए सक्षम बनाया जा रहा है। यह गतिविधि छोटे और सीमांत किसानों, भूमिहीन परिवारों, महिलाओं और ग्रामीण युवाओं के लिए घर के पास रोजगार का सशक्त माध्यम बन रही है, जहां कम निवेश में नियमित आमदनी संभव है।

ये जिले मशरूम उत्पादन में सबसे आगे

कृषि मंत्री के अनुसार मुजफ्फरपुर, पटना, नालंदा, गया, वैशाली और पश्चिम चंपारण जिले मशरूम उत्पादन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं। इन जिलों में उत्पादित मशरूम स्थानीय बाजारों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल तक भेजे जा रहे हैं, जिससे किसानों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिल रहा है।

गांवों में बढ़ रहे रोजगार के नए अवसर

मशरूम उत्पादन से ग्रामीण परिवारों को कई स्तरों पर लाभ मिल रहा है। इसे कम जगह में परिवार श्रम आधारित और महिला-हितैषी घरेलू उद्यम के रूप में अपनाया जा रहा है। धान और गेहूं के भूसे जैसे कृषि अवशेषों के उपयोग से लागत कम हो रही है और ‘कचरा से कमाई’ की अवधारणा को बढ़ावा मिल रहा है। मुख्य खेती के साथ अतिरिक्त आय के रूप में यह गतिविधि तेजी से लोकप्रिय हो रही है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक जरूरतों पर खर्च करना आसान हो रहा है। इसके साथ ही छंटाई, पैकिंग, भंडारण, परिवहन और प्रसंस्करण से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।

मशरूम उगाकर आत्मनिर्भर बन रहीं महिलाएं

कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के विजन और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की आत्मनिर्भर बिहार की परिकल्पना के अनुरूप राज्य सरकार मशरूम उत्पादन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बना रही है। यह गतिविधि कम संसाधनों में अधिक आय, पोषण सुरक्षा और स्थानीय रोजगार उपलब्ध कराकर किसानों, महिलाओं और युवाओं को आत्मनिर्भर बना रही है।

उन्होंने बताया कि मशरूम उत्पादन को और बढ़ावा देने के लिए केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत वातानुकूलित आधारभूत संरचना की स्थापना की जा रही है। साथ ही राज्य योजना मद से मशरूम किट का वितरण और झोपड़ी आधारित मशरूम इकाइयों का निर्माण कराया जा रहा है। यह योजना राज्य के सभी जिलों में लागू की जा रही है।

इच्छुक किसान यहां से ले सकते हैं जानकारी

कृषि मंत्री ने इच्छुक किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों और युवा उद्यमियों से अपील की कि वे प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और योजनाओं का लाभ लेने के लिए अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), प्रखंड या जिला उद्यान कार्यालय तथा मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण इकाइयों से संपर्क करें।

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