Site icon Agriculture| Kheti| Krishi| Farm| Farmer| Agriculture| News

बकरी पालन में मोरिंगा बढ़ाएगा दूध और उत्पादन

moringa leaves goat feed

मथुरा: बकरी पालन में बेहतर उत्पादन और मुनाफा पाने के लिए सही खुराक का बड़ा महत्व होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बकरे और बकरियों को पौष्टिक हरा चारा देने से उनकी वृद्धि, दूध उत्पादन और स्वास्थ्य में सुधार होता है। ऐसे में मोरिंगा एक बेहद उपयोगी चारे के रूप में सामने आया है, जो सालभर उपलब्ध रहता है और पोषण से भरपूर होता है।

जून में करें मोरिंगा की बुवाई की तैयारी

बकरी पालन से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार मोरिंगा की बुवाई का सही समय जून होता है, लेकिन इसके लिए तैयारी मई से ही शुरू कर देनी चाहिए। बरसात के मौसम में भी इसकी रोपाई की जा सकती है। यह पौधा कम देखभाल में तेजी से बढ़ता है और इसके लिए रासायनिक खाद की जरूरत नहीं होती, जिससे यह प्राकृतिक रूप से तैयार होता है।

पोषण से भरपूर हरा चारा

मोरिंगा में प्रोटीन, विटामिन और खनिज तत्वों की मात्रा अधिक होती है, जो बकरियों के लिए बेहद फायदेमंद है। नियमित रूप से इसका सेवन कराने से बकरियों की सेहत बेहतर रहती है, दूध उत्पादन बढ़ता है और बकरों की वृद्धि भी तेज होती है। यह चारा अन्य हरे चारे की तुलना में अधिक पौष्टिक माना जाता है।

पत्तियां और तना दोनों उपयोगी

मोरिंगा की खासियत यह है कि इसके पत्तों के साथ-साथ तना भी बकरियां आसानी से खा लेती हैं, क्योंकि इसका तना मुलायम होता है। जब उत्पादन अधिक हो तो पत्तियों को सीधे चारे के रूप में दिया जा सकता है और तनों से चारा बनाकर भविष्य के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है।

सालभर चारे की उपलब्धता

विशेषज्ञों के अनुसार मोरिंगा ऐसा पौधा है, जिससे सालभर हरा चारा प्राप्त किया जा सकता है। इससे बकरी पालकों को हर मौसम में पौष्टिक चारा उपलब्ध रहता है और सूखे या गर्मी के समय चारे की कमी की समस्या कम हो जाती है। कुल मिलाकर, मोरिंगा बकरी पालन को लाभदायक बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

ये भी पढ़ें: मध्यप्रदेश में डेयरी को बढ़ावा, पशुपालकों को सब्सिडी और सुविधाएं

Exit mobile version