लखनऊ: पशुपालकों के लिए गाय-भैंस के बच्चा देने का समय खुशी के साथ चिंता भी लेकर आता है। अक्सर देखा जाता है कि बच्चा देने के दो से तीन दिन बाद ही पशु का दूध उत्पादन कम होने लगता है। कई पशुपालक इसे बछड़े द्वारा दूध पीने का कारण मान लेते हैं, जबकि विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कई अन्य महत्वपूर्ण कारण होते हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना नुकसानदायक साबित हो सकता है।
दूध कम होने के पीछे ये हैं मुख्य कारण
विशेषज्ञों के मुताबिक बच्चा देने के बाद दूध उत्पादन में गिरावट के पीछे पांच प्रमुख वजहें होती हैं, जिन पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।
- पहला कारण गर्भाशय में संक्रमण है। इस स्थिति में पशु को बुखार, सुस्ती और भूख कम लगने जैसी समस्याएं दिखती हैं। साथ ही बदबूदार तरल निकलता रहता है और दूध उत्पादन तेजी से घटता है।
- दूसरा कारण थन से जुड़ी बीमारी है। इसमें थन में सूजन और गर्माहट महसूस होती है। दूध में थक्के बनने लगते हैं और दूध की मात्रा अचानक कम हो जाती है।
- तीसरा कारण कैल्शियम की कमी है। इस स्थिति में पशु कमजोर और सुस्त दिखाई देता है, उसकी भूख और जुगाली कम हो जाती है और दूध उत्पादन अपेक्षा से कम हो जाता है।
- चौथा कारण पर्याप्त पोषण की कमी है। बच्चा देने के बाद पशु को अधिक दाना, चारा और पानी की जरूरत होती है। यदि यह पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलता तो दूध उत्पादन घट जाता है।
- पांचवां कारण ऊर्जा की कमी है। खासकर अधिक दूध देने वाले पशुओं में ऊर्जा की कमी होने पर भूख कम लगती है, वजन घटता है और दूध उत्पादन प्रभावित होता है।
दूध कम होने पर तुरंत करें ये उपाय
विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे ही दूध उत्पादन कम होता दिखे, पशुपालकों को तुरंत कुछ जरूरी जांच करनी चाहिए। पशु के शरीर का तापमान जांचें, उसकी भूख और जुगाली पर ध्यान दें और थन की नियमित जांच करें। इसके अलावा यह भी देखना जरूरी है कि गर्भाशय से किसी प्रकार का असामान्य तरल तो नहीं निकल रहा। पशु को पर्याप्त मात्रा में दाना, चारा और साफ पानी देना भी बेहद जरूरी है।
साफ-सफाई और देखभाल है सबसे जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार बच्चा देने के बाद पशु की देखभाल पर विशेष ध्यान देना चाहिए। पशु को जहां रखा गया है, वहां साफ-सफाई अच्छी होनी चाहिए। साथ ही मौसम के अनुसार उसे सुरक्षित रखने के उपाय भी जरूरी हैं। यदि समय रहते इन संकेतों को पहचान लिया जाए और उचित देखभाल की जाए, तो दूध उत्पादन में गिरावट को रोका जा सकता है और पशु को बीमारियों से बचाया जा सकता है।
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