नई दिल्ली: देश में पिछले कुछ वर्षों से पशुओं के लिए हरे और सूखे चारे की भारी कमी देखने को मिल रही है। स्थिति ऐसी बन गई है कि बाजार में जो चारा उपलब्ध है, वह आम किसानों की पहुंच से बाहर होता जा रहा है। इसकी सीधी मार भेड़-बकरी और गाय-भैंस पालन करने वाले किसानों पर पड़ रही है। पशुओं को पर्याप्त पोषण न मिलने के कारण दूध का उत्पादन घट रहा है, जिससे बाजार में दूध के दाम भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इस समस्या का समाधान अब वैज्ञानिक ढंग से खोजा जा रहा है। केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (CIRG), मथुरा के चारा विशेषज्ञों के मुताबिक, साइलेज (Silage) एक ऐसा विकल्प है जो पूरे साल चारे की कमी को दूर कर सकता है। खास बात यह है कि साइलेज को किसान खुद अपने घर पर भी तैयार कर सकते हैं, बस इसके लिए कुछ सावधानियों और तकनीकों का पालन करना जरूरी है।
साइलेज तैयार करते समय बरतें ये सावधानियां
साइलेज बनाने की प्रक्रिया जितनी उपयोगी है, उतनी ही संवेदनशील भी है। बिना विशेषज्ञ की सलाह या प्रशिक्षण के यदि गलत तरीके से साइलेज तैयार किया जाए, तो वह पशुओं की सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। सबसे पहले उस हरे चारे का चयन करें, जिसका साइलेज बनाना है और उसकी कटाई सुबह के समय करें। कटाई के बाद चारे के पत्तों को अच्छी तरह सुखाना जरूरी है, लेकिन ध्यान रखें कि चारा सीधे जमीन पर न सुखाया जाए। इसकी बजाय लोहे की जाली, स्टैंड या रस्सियों पर छोटे-छोटे गठ्ठर बनाकर चारे को लटकाया जा सकता है। सीधे जमीन पर चारा सुखाने से उसमें फंगस लगने की आशंका रहती है, जो पशुओं के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह है। चारे को तब तक सुखाना चाहिए जब तक उसमें लगभग 15 से 18 प्रतिशत तक नमी रह जाए। इस स्तर पर पहुंचने के बाद ही उसका साइलेज बनाया जाना चाहिए।
किन फसलों से बनाएं बेहतरीन साइलेज
साइलेज बनाने के लिए पतले तने वाली फसलें अधिक उपयुक्त मानी जाती हैं। इन फसलों में फंगस लगने की संभावना कम होती है और ये जल्दी सूख जाती हैं। ध्यान रहे कि फसल को पूरी तरह पकने से पहले ही काट लेना चाहिए, ताकि उसमें पोषक तत्वों की अधिकता बनी रहे। कटाई के बाद फसल के तनों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटना जरूरी होता है, जिससे उन्हें सुखाने और स्टोर करने में आसानी हो। तनों की नमी की जांच हाथ से तोड़कर की जा सकती है। अगर तना हाथ से आसानी से टूटता है, तो यह संकेत है कि वह सही नमी स्तर पर पहुंच चुका है। इस स्थिति में तैयार फसल से अच्छा साइलेज बनाया जा सकता है।
हर मौसम में राहत देता है साइलेज
साइलेज पशुओं के लिए ऐसा स्टोर किया गया पोषक आहार है, जो हर मौसम में काम आता है। चारे की भारी कमी वाले समय, चाहे वह गर्मी का हो या बरसात का। साइलेज पशुओं के लिए एक स्थायी समाधान बन सकता है। यह न केवल चारे की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करता है, बल्कि इससे दूध की गुणवत्ता और मात्रा में भी सुधार होता है। चारा विशेषज्ञों के अनुसार, अगर किसान हर मौसम के लिए साइलेज बनाकर स्टोर करने की आदत डाल लें, तो पशुओं की सेहत, प्रजनन क्षमता और दूध उत्पादन में जबरदस्त सुधार देखा जा सकता है। यह प्रणाली छोटे और मध्यम स्तर के पशुपालकों के लिए खासतौर से फायदेमंद हो सकती है, जो सीमित संसाधनों में अधिक लाभ की तलाश में रहते हैं।
देश में बढ़ती चारा संकट की समस्या का प्रभाव केवल पशुपालन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर सीधे आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी पड़ता है। दूध और दुग्ध उत्पादों की कीमतें चारे की उपलब्धता से जुड़ी होती हैं। ऐसे में साइलेज एक दीर्घकालिक समाधान बनकर उभर सकता है, जिससे किसान आत्मनिर्भर हो सकते हैं और उपभोक्ताओं को भी राहत मिल सकती है। अब समय आ गया है कि वैज्ञानिक सलाह और प्रशिक्षण लेकर किसान खुद साइलेज तैयार करें और चारे की कमी से होने वाले नुकसान से बचें।

