नई दिल्ली: देश के प्रमुख मक्का उत्पादक राज्यों में जनवरी 2026 में मक्का के थोक बाजार भाव में तेज गिरावट दर्ज की गई है। एकमार्कनेट पोर्टल पर उपलब्ध राज्यवार प्राइस ट्रेंड रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2026 में ज्यादातर राज्यों में मक्का का औसत भाव सरकार द्वारा तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2400 रुपये प्रति क्विंटल से काफी नीचे रहा। इससे किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2026 में देश का औसत थोक मक्का भाव 1999 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जबकि दिसंबर 2025 में यह 2175 रुपये और जनवरी 2025 में 2484 रुपये प्रति क्विंटल था। यानी एक साल में औसतन 480 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।
मध्य प्रदेश में MSP से 800 रुपये कम भाव
मध्य प्रदेश, जो देश के प्रमुख मक्का उत्पादक राज्यों में शामिल है, वहां जनवरी 2026 में औसत भाव 1601 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जो MSP से करीब 800 रुपये कम है। पिछले साल जनवरी में प्रदेश में यही भाव 2258 रुपये प्रति क्विंटल था।
पंजाब, हरियाणा और छत्तीसगढ़ में भी हालात खराब
पंजाब में मक्का का औसत भाव 1768 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। हरियाणा में दिसंबर के आंकड़ों के आधार पर भाव करीब 1500 रुपये रहा, जबकि छत्तीसगढ़ में यह 1834 रुपये प्रति क्विंटल रहा। ये सभी कीमतें MSP से काफी नीचे हैं।
गुजरात में जनवरी 2026 के दौरान मक्का का भाव 1989 रुपये और महाराष्ट्र में 1682 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। केवल तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे कुछ राज्यों में भाव 2200 से 2700 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहे, लेकिन वहां भी सालाना आधार पर गिरावट देखने को मिली है।
अन्य फसलें छोड़कर बोई थी मक्का
कई किसानों ने कपास और गन्ने जैसी फसलें छोड़कर खरीफ सीजन में मक्का की बुवाई की थी। इसी वजह से मक्का का रकबा भी बढ़ा, लेकिन अच्छे उत्पादन के बावजूद किसानों को उनकी फसल का उचित दाम नहीं मिल पा रहा है।
रबी मक्का आने से पहले ही दाम कमजोर
खरीफ सीजन के बाद अब रबी सीजन की मक्का फसल की कटाई मार्च के अंत या अप्रैल से शुरू होगी। लेकिन उससे पहले ही बाजार भाव लगातार नीचे बने हुए हैं। अगर यही स्थिति रही तो औसत कीमतें उत्पादन लागत से भी नीचे जा सकती हैं।
सरकार को करना पड़ सकता है हस्तक्षेप
हाल ही में कर्नाटक और तेलंगाना सरकारों ने मक्का किसानों को गिरते दाम से राहत दिलाने के लिए सहायता कदम उठाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि निजी बाजार में यही हालात बने रहे, तो अन्य प्रमुख मक्का उत्पादक राज्यों में भी सरकारों को किसानों को घाटे से बचाने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ेगा।
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