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मक्का किसानों पर दोहरी मार, इस हफ्ते थोक भावों में तेज गिरावट

maize farmers

नई दिल्ली: देशभर में मक्का किसानों को लंबे समय से सही दाम नहीं मिल पा रहे हैं। कई राज्यों में हालात ऐसे हैं कि किसानों की लागत तक निकलना मुश्किल हो गया है। फरवरी 2026 के दूसरे हफ्ते में मक्का के थोक भावों में देश के अधिकांश राज्यों में गिरावट दर्ज की गई है। राज्यवार साप्ताहिक प्राइस ट्रेंड आंकड़ों के अनुसार, 9 से 15 फरवरी के लिए मक्का का औसत थोक भाव 1,924.50 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जो पिछले हफ्ते और बीते महीने की तुलना में काफी कम है। विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में मक्का की आवक लगातार बढ़ रही है, जबकि मांग अपेक्षाकृत कमजोर बनी हुई है। यही कारण है कि मंडियों में कीमतों पर दबाव बना हुआ है और किसानों को अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है।

प्रमुख राज्यों में 1 से 26 प्रतिशत तक गिरावट

आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख उत्पादक और खपत वाले राज्यों में पिछले सप्ताह की तुलना में मक्का के भाव 1 से 26 प्रतिशत तक गिरे हैं।

मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में भी मक्का के भाव कमजोर बने हुए हैं, जहां हाल के दिनों में मंडियों में बड़ी मात्रा में आवक दर्ज की गई है।

मध्य प्रदेश की मंडियों में मक्का के भाव

मध्य प्रदेश की विभिन्न कृषि उपज मंडियों में 12 फरवरी 2026 को मक्का की कुल आवक 16,628.23 मीट्रिक टन दर्ज की गई। सबसे अधिक आवक छिंदवाड़ा APMC में रही, जहां करीब 2,394.79 मीट्रिक टन मक्का पहुंचा। इसके बाद अमरवाड़ा APMC में 2,002.10 मीट्रिक टन और चौरई APMC में 1,056.59 मीट्रिक टन की आवक दर्ज की गई। भोपाल, खातेगांव, हरसूद, अलीराजपुर, धामनोद, करेली, खरगोन, हरदा और गुना जैसी मंडियों में औसत भाव 1,401 रुपये से 1,600 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहे।

महाराष्ट्र की मंडियों में कीमतों की स्थिति

महाराष्ट्र की मंडियों में 12 फरवरी 2026 को मक्का की कुल आवक 2,708.31 मीट्रिक टन दर्ज की गई। सबसे अधिक आवक नाशिक जिले की मालेगांव मंडी में रही, जहां 785 मीट्रिक टन मक्का पहुंचा। इसके बाद सटाणा मंडी में 462 मीट्रिक टन और लासलगांव मंडी में 337.50 मीट्रिक टन की आवक दर्ज की गई। राज्य की प्रमुख मंडियों में औसत भाव 1,450 रुपये से 1,900 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहे, जबकि मुंबई और पुणे जैसी बड़ी मंडियों में कुछ बेहतर भाव देखने को मिले।

मासिक और वार्षिक आधार पर भी कमजोरी

मासिक और वार्षिक तुलना में भी मक्का के भाव कमजोर बने हुए हैं। अधिकांश राज्यों में पिछले महीने और पिछले साल के मुकाबले कीमतें 20 से 55 प्रतिशत तक नीचे हैं। आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश में सालाना आधार पर 30 से 56 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे कुछ राज्यों में सीमित बढ़त या स्थिरता देखने को मिली है, लेकिन कुल मिलाकर बाजार का रुख कमजोर ही बना हुआ है।

आगे क्या हो सकती है स्थिति

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले हफ्तों में मांग में सुधार नहीं हुआ और निर्यात या सरकारी हस्तक्षेप नहीं बढ़ा, तो मक्का के भावों पर दबाव बना रह सकता है। किसानों को उम्मीद है कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी या किसी अन्य राहत पैकेज के जरिए दामों को सहारा देगी।

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