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महाराष्ट्र के प्याज किसानों पर संकट, सरकार के फैसले से गहराया नुकसान

महाराष्ट्र में प्याज किसानों की हालत लगातार खराब होती जा रही है। खेतों में कड़ी मेहनत और मंडी में फसल बेचने के बाद भी किसान अपनी लागत तक नहीं निकाल पा रहे। प्याज की खेती पर 22 से 25 रुपये प्रति किलो तक खर्च आता है, लेकिन किसानों को मंडियों में महज 6 से 9 रुपये प्रति किलो दाम मिल रहा है। यानी लागत से चार गुना कम दाम मिलने के कारण किसान आर्थिक संकट में हैं। ऐसे हालात में सरकार ने गुरुवार से राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ (NCCF), नेफेड (NAFED) और केंद्रीय भंडार के जरिए मोबाइल वैनों से प्याज की सस्ती बिक्री शुरू कर दी है। अब आम उपभोक्ताओं को प्याज मात्र 24 रुपये प्रति किलो की दर पर उपलब्ध होगा।

प्याज उत्पादकों का कहना है कि सरकार का यह कदम पूरी तरह किसान विरोधी है। उनका आरोप है कि जब प्याज के दाम गिरते हैं तब सरकार चुप रहती है, लेकिन जैसे ही दाम थोड़ा बढ़ते हैं, तो बफर स्टॉक खोल दिया जाता है या एक्सपोर्ट पर रोक लगा दी जाती है। इस वजह से किसान सही दाम से वंचित रह जाते हैं।

किसानों का कहना है कि सरकार को बफर स्टॉक केवल तभी खोलना चाहिए जब बाजार में प्याज की कमी हो या दाम अत्यधिक बढ़ जाएं। फिलहाल न तो मंडियों में प्याज की कमी है और न ही खुदरा कीमतें ज्यादा बढ़ी हैं। इसके बावजूद सरकार का यह कदम सीधे तौर पर किसानों की आय पर चोट करता है। वहीं उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की दलील है कि सस्ते प्याज की बिक्री से आम जनता को राहत मिलेगी और महंगाई पर नियंत्रण रखा जा सकेगा। लेकिन किसान संगठनों का मानना है कि इस फैसले ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

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