नई दिल्ली: न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और कृषि से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर देशभर के किसान संगठनों ने बड़े आंदोलन की घोषणा की है। ‘देश बचाओ मोर्चा’ के बैनर तले 21 जुलाई को दिल्ली के किसान घाट पर एक दिवसीय महापंचायत और प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम संसद सत्र के पहले दिन प्रस्तावित है, जिसमें देशभर से किसान, मजदूर, विद्यार्थी और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की बात कही गई है।
देशभर के किसान संगठनों ने आंदोलन को दिया समर्थन
किसान नेताओं ने प्रेस वार्ता में बताया कि आंदोलन को व्यापक स्वरूप देने के लिए एक बड़ी समिति का गठन किया गया है, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। उनके अनुसार देशभर के अनेक किसान संगठनों ने बैठक में भाग लेकर इस आंदोलन का समर्थन किया है। नेताओं ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य किसानों से जुड़े प्रमुख मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना और सरकार का ध्यान उनकी मांगों की ओर आकर्षित करना है।
15 जुलाई को निकलेगा मोटरसाइकिल मार्च
आंदोलन की तैयारी के तहत 15 जुलाई को देशभर में मोटरसाइकिल मार्च निकाला जाएगा। इस दौरान किसान अपने-अपने जिलों और क्षेत्रों में प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपेंगे। किसान नेताओं का कहना है कि यह मार्च चरणबद्ध आंदोलन का हिस्सा होगा और इसके माध्यम से किसानों की मांगों को व्यापक स्तर पर जनसमर्थन दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
व्यापार समझौते और कृषि नीतियों पर उठाए सवाल
प्रेस वार्ता के दौरान किसान नेताओं ने केंद्र सरकार की विभिन्न नीतियों पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का कृषि क्षेत्र पर प्रभाव पड़ सकता है और किसानों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों में कृषि क्षेत्र से जुड़े हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि किसानों को किसी प्रकार का आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े।
आंदोलन तेज करने की दी चेतावनी
किसान संगठनों ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को आगे और व्यापक बनाया जाएगा। इसके लिए ‘देश बचाओ मोर्चा’ के नाम से एक साझा मंच तैयार किया गया है, जिसमें किसान, मजदूर, कर्मचारी, विद्यार्थी, युवा और समाजसेवा से जुड़े विभिन्न संगठनों की भागीदारी रहेगी। नेताओं ने बताया कि इस मंच की सामान्य परिषद में प्रत्येक सहभागी संगठन का एक प्रतिनिधि शामिल होगा, जिससे सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।
किसानों की प्रमुख मांगें
किसान संगठनों ने सरकार के समक्ष कई प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को तत्काल रद्द करने, सभी फसलों के लिए स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप लागत पर पचास प्रतिशत लाभ जोड़कर न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी देने, किसानों की संपूर्ण कर्जमुक्ति सुनिश्चित करने, जल संरक्षण और राष्ट्रीय जल नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने तथा किसानों को उनकी उपज का लाभकारी और सुनिश्चित मूल्य उपलब्ध कराने की मांग शामिल है। किसान संगठनों ने कहा कि 21 जुलाई को दिल्ली के किसान घाट पर आयोजित महापंचायत और जनसभा में देशभर से बड़ी संख्या में किसान, मजदूर, कर्मचारी, विद्यार्थी, युवा और विभिन्न जनसंगठनों के प्रतिनिधि शामिल होकर अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाएंगे।
ये भी पढ़ें: पंजाब में बिजली संकट से धान की फसल पर मंडराया खतरा

