नई दिल्ली: गर्मियों का मौसम पशुपालन के लिए चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। बढ़ते तापमान और संक्रमण के खतरे के कारण पशुओं में बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है, जिसका सीधा असर पशुपालकों की आय पर पड़ता है। ऐसे में जूनोसिस यानी पशुओं से इंसानों में फैलने वाली बीमारियां भी चिंता का बड़ा कारण बन रही हैं। इन्हीं समस्याओं से निपटने के लिए सरकार ने नेशनल वन हेल्थ मिशन के तहत पशुपालकों को जागरूक करने और वैज्ञानिक तरीके अपनाने पर जोर दिया है। इस मिशन का उद्देश्य पशुओं और इंसानों दोनों को सुरक्षित रखना है, क्योंकि कई बीमारियां दोनों को प्रभावित करती हैं।
बायो सुरक्षा अपनाना बेहद जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार पशु फार्म पर बायो सुरक्षा के उपाय अपनाना सबसे जरूरी है। इसके तहत फार्म की बाड़बंदी करना जरूरी है, ताकि बाहर के जानवर अंदर न आ सकें। इसके साथ ही फार्म के अंदर और बाहर नियमित रूप से दवा का छिड़काव किया जाना चाहिए। फार्म में आने वाले लोगों के लिए भी सावधानी जरूरी है। बाहर से आने वाले व्यक्ति के जूते बाहर उतरवाना या उन्हें साफ करना, हाथ और कपड़ों को स्वच्छ रखना और सुरक्षा किट का उपयोग करना संक्रमण को रोकने में मदद करता है।
नए पशुओं को रखें अलग
पशुपालकों को सलाह दी गई है कि नए खरीदे गए पशुओं को सीधे अन्य पशुओं के साथ न रखें। उन्हें कम से कम 15 दिनों तक अलग रखना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार के संक्रमण का खतरा कम किया जा सके।
पशुओं का अलग-अलग रखरखाव जरूरी
पशुओं को उनकी स्थिति के अनुसार अलग-अलग रखना भी जरूरी है। छोटे, बीमार, गर्भवती और दूध देने वाले पशुओं के लिए अलग व्यवस्था करनी चाहिए। इससे संक्रमण फैलने का खतरा कम होता है और सभी पशुओं की देखभाल बेहतर तरीके से हो पाती है।
मौसम के अनुसार रखें खास ध्यान
गर्मी और बरसात के मौसम में मच्छर और मक्खियों का प्रकोप बढ़ जाता है, जिससे बीमारियों का खतरा और बढ़ जाता है। इसलिए पशुपालकों को अपने पशुओं को इनसे बचाने के लिए विशेष उपाय करने चाहिए। वैज्ञानिक तरीके अपनाकर और साफ-सफाई का ध्यान रखकर पशुपालक गर्मी के मौसम में अपने पशुओं को बीमारियों से बचा सकते हैं और नुकसान से बच सकते हैं।
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