Site icon Agriculture| Kheti| Krishi| Farm| Farmer| Agriculture| News

10 करोड़ किसानों की बनी किसान आईडी

Kisan ID

नई दिल्ली, 25 जुलाई 2026: केंद्र सरकार देशभर के किसानों की डिजिटल पहचान तैयार करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। 20 जुलाई 2026 तक 10.18 करोड़ से अधिक किसानों की किसान आईडी बनाई जा चुकी है। इस डिजिटल पहचान का उपयोग अब विभिन्न कृषि योजनाओं और सरकारी सेवाओं को एकीकृत करने के लिए किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य किसानों को एक ही डिजिटल पहचान के माध्यम से योजनाओं का लाभ आसानी से उपलब्ध कराना और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।

किसान आईडी से योजनाओं का मिलेगा सीधा लाभ

सरकार के अनुसार किसान आईडी को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद, कृषि ऋण, कृषि आदान वितरण और प्राकृतिक आपदा राहत जैसी योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। इससे पात्र किसानों तक सरकारी सहायता समय पर और पारदर्शी तरीके से पहुंचाने में मदद मिलेगी।

उत्तर प्रदेश सबसे आगे, कई बड़े राज्य भी शामिल

सरकारी आंकड़ों के अनुसार किसान आईडी बनाने में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है, जहां 2.43 करोड़ से अधिक किसानों का पंजीकरण किया जा चुका है। इसके बाद महाराष्ट्र में 1.35 करोड़, मध्य प्रदेश में 1.13 करोड़ और राजस्थान में 87.23 लाख किसान इस डिजिटल व्यवस्था से जुड़ चुके हैं। कर्नाटक, गुजरात, बिहार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु भी इस अभियान में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

उपग्रह तकनीक से फसल बीमा होगा अधिक सटीक

सरकार ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में अब उपग्रह आधारित निगरानी और दूरसंवेदी तकनीक का उपयोग बढ़ाया जा रहा है। तकनीक आधारित उपज अनुमान प्रणाली के माध्यम से फसल उत्पादन का अधिक सटीक आकलन किया जाएगा। इससे फसल कटाई के आंकड़ों की विश्वसनीयता बढ़ेगी और बीमा दावों के निर्धारण में अधिक पारदर्शिता आएगी।

प्राकृतिक आपदा के नुकसान का होगा जल्द आकलन

बाढ़, सूखा और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों की पहचान अब उपग्रह आधारित निगरानी से तेजी से की जा रही है। सरकार का कहना है कि इससे बीमा कंपनियों और राज्य सरकारों के बीच क्षेत्रफल तथा उत्पादन से जुड़े विवाद कम होंगे और किसानों के बीमा दावों का निपटारा पहले की तुलना में अधिक तेजी से किया जा सकेगा।

ड्रोन खरीद पर किसानों को मिल रही आर्थिक सहायता

कृषि यंत्रीकरण उप-मिशन के तहत कृषि स्नातकों तथा पूर्वोत्तर राज्यों के छोटे और सीमांत किसानों को किसान ड्रोन खरीदने पर 50 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता दी जा रही है। अन्य किसानों के लिए 40 प्रतिशत तक सहायता का प्रावधान है। इसके अलावा किसान ड्रोन किराये पर उपलब्ध कराने के लिए केंद्र स्थापित करने पर भी 40 प्रतिशत तक आर्थिक सहायता दी जा रही है। योजना के अंतर्गत अब तक 2,122 ड्रोन वितरित अथवा स्वीकृत किए जा चुके हैं।

ड्रोन प्रशिक्षण और महिला समूहों को मिल रहा बढ़ावा

कृषि मंत्रालय के अधीन विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों में ड्रोन पायलट प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है। अब तक 155 ड्रोन पायलट प्रशिक्षित किए जा चुके हैं। वहीं, ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना के तहत चयनित महिला स्वयं सहायता समूहों को 15 दिन का व्यापक प्रशिक्षण और ड्रोन संचालन का प्रमाणन दिया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत अब तक 1,094 ड्रोन महिला स्वयं सहायता समूहों को उपलब्ध कराए जा चुके हैं।

डिजिटल कृषि की ओर बढ़ रहा देश

विशेषज्ञों का मानना है कि किसान आईडी, उपग्रह आधारित निगरानी, ड्रोन तकनीक और डिजिटल सेवाओं का विस्तार भारतीय कृषि को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ सही किसानों तक पहुंचेगा, कृषि प्रबंधन अधिक प्रभावी होगा और किसानों की आय बढ़ाने के प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी।

ये भी पढ़ें: किसानों को सीधे नहीं मिलेगी खाद सब्सिडी

Exit mobile version