नई दिल्ली: देश में खरीफ सीजन की बुवाई ने अब रफ्तार पकड़ ली है। 25 जुलाई को समाप्त सप्ताह में बुवाई में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। कृषि मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, अब तक 829.4 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई पूरी हो चुकी है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 797.7 लाख हेक्टेयर था। यह कुल वृद्धि करीब 4 प्रतिशत की है, जो बुआई की गति में स्पष्ट तेजी का संकेत देती है।
सिर्फ एक सप्ताह में बुवाई के आंकड़े में 11 लाख हेक्टेयर का इजाफा हुआ है। 18 जुलाई तक जहां यह रकबा 110 लाख हेक्टेयर था, वहीं अब यह बढ़कर 121 लाख हेक्टेयर हो गया है। देश में खरीफ सीजन के लिए अनुमानित सामान्य क्षेत्रफल 1,097 लाख हेक्टेयर है, जिसका 75 प्रतिशत हिस्सा अब तक बुवाई के दायरे में आ चुका है।
धान, मूंग और मक्का जैसी प्रमुख फसलों के रकबे में सबसे ज्यादा वृद्धि देखी गई है। धान की बुवाई इस साल जोरदार रही है और इसका रकबा 216.2 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 245.1 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है। यानी धान की बुवाई में 13.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो देश की खाद्य सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
दलहनों के क्षेत्रफल में भी सुधार देखा गया है। अब तक 93.1 लाख हेक्टेयर में दलहनों की बुवाई हो चुकी है, जो पिछले वर्ष के 89.9 लाख हेक्टेयर से 3.5 प्रतिशत अधिक है। मूंग की बुवाई में सबसे अधिक उछाल आया है, जिसका रकबा 26.4 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 30.6 लाख हेक्टेयर हो गया है, यानी 16.1 प्रतिशत की वृद्धि। हालांकि उड़द और अरहर जैसी फसलों के रकबे में गिरावट दर्ज की गई है। उड़द की बुवाई 17.8 लाख हेक्टेयर से घटकर 16.6 लाख हेक्टेयर रह गई, जबकि अरहर का रकबा 38 लाख हेक्टेयर से घटकर 34.9 लाख हेक्टेयर हो गया है।
मोटे अनाजों में भी वृद्धि देखने को मिली है। कुल रकबा 155 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 160.7 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। मक्का की बुवाई में खास तौर पर 8.4 प्रतिशत की बढ़त हुई है, और इसका कुल क्षेत्रफल 85.6 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। ज्वार का रकबा मामूली बढ़कर 12.5 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि बाजरा अब भी पिछले साल के स्तर यानी 55 लाख हेक्टेयर पर स्थिर बना हुआ है।
हालांकि कुछ फसलों के रकबे में गिरावट चिंता का कारण बनी हुई है। तिलहन फसलों की बुवाई 170.7 लाख हेक्टेयर से घटकर 166.9 लाख हेक्टेयर रह गई है। सोयाबीन का रकबा भी 121.4 लाख हेक्टेयर से गिरकर 116.7 लाख हेक्टेयर पर आ गया है। इसमें 3.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं मूंगफली में मामूली बढ़ोतरी हुई है और इसका रकबा 41.2 लाख हेक्टेयर हो गया है। सूरजमुखी की बुवाई में भी हल्की कमी आई है, जो 0.59 लाख हेक्टेयर से घटकर 0.56 लाख हेक्टेयर रह गई है।
कपास की फसल भी पिछड़ती दिख रही है। इसका रकबा 105.5 लाख हेक्टेयर से घटकर 103.2 लाख हेक्टेयर पर आ गया है, यानी 2.2 प्रतिशत की गिरावट। सामान्य मॉनसून की स्थिति और किसानों की तत्परता के चलते खरीफ बुवाई में अब लगातार तेजी देखी जा रही है। हालांकि कुछ फसलों की बुवाई पिछली बार से कम है, लेकिन कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी सप्ताहों में बुवाई की गति और तेज हो सकती है। सरकार और कृषि विभाग की नजर अब इन आंकड़ों पर बनी हुई है ताकि समय रहते आवश्यक नीतिगत हस्तक्षेप किया जा सके।

