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खरीफ प्याज की खेती से बढ़ सकती है किसानों की आमदनी

Kharif onion cultivation

नई दिल्ली: खरीफ प्याज की बुवाई का समय शुरू हो चुका है और जुलाई माह भर इसकी खेती का कार्य जारी रहेगा। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि खरीफ मौसम में प्याज की खेती किसानों के लिए लाभदायक विकल्प बन सकती है। इस मौसम में प्याज को अधिक सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन मिट्टी में पर्याप्त नमी बनाए रखना जरूरी है ताकि बीजों का समय पर अंकुरण हो सके। विशेषज्ञों का कहना है कि सही तकनीक, उपयुक्त किस्म और समय पर प्रबंधन अपनाकर किसान बेहतर उत्पादन के साथ अधिक लाभ अर्जित कर सकते हैं।

खरीफ प्याज से मिल सकता है बेहतर लाभ

विशेषज्ञों के अनुसार उत्तर भारत में खरीफ प्याज की खेती किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ बाजार में प्याज की उपलब्धता बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। सामान्यतः नवंबर के बाद रबी प्याज का भंडार कम होने लगता है, जिससे उत्तर भारत में प्याज की आपूर्ति घट जाती है और कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिलती है। ऐसे समय में खरीफ प्याज की फसल बाजार में आने से आपूर्ति बनी रहती है और किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

सेट्स तकनीक से बढ़ सकता है उत्पादन

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की रिपोर्ट के अनुसार खरीफ प्याज के उत्पादन को बढ़ाने के लिए ‘सेट्स’ तकनीक प्रभावी मानी जाती है। इस तकनीक में मार्च से मई के दौरान छोटे प्याज तैयार किए जाते हैं और उन्हें अगस्त तक सुरक्षित रखा जाता है। इसके बाद अगस्त के दूसरे पखवाड़े में इन्हें खेतों में रोपा जाता है। इस विधि से तैयार फसल की कटाई अक्टूबर से दिसंबर के बीच की जा सकती है। इस अवधि में प्याज की बाजार में मांग अधिक रहती है, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना रहती है।

सही किस्म का चयन है सफलता की कुंजी

विशेषज्ञों का कहना है कि खरीफ प्याज की खेती में उचित किस्म का चयन सबसे महत्वपूर्ण होता है। ऐसी किस्में चुननी चाहिए जिनमें जल्दी कंद बनने की क्षमता, रोगों के प्रति सहनशीलता, पतली गर्दन तथा जलभराव सहने की क्षमता हो। खरीफ मौसम के लिए लगभग 90 से 105 दिनों में तैयार होने वाली किस्मों को उपयुक्त माना जाता है। एग्रीफाउंड डार्क रेड, एन-53, बसवंत-780 और अर्का कल्याण जैसी किस्में इस मौसम में अच्छे उत्पादन के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं।

बुवाई का समय और तरीका

देश के विभिन्न राज्यों में खरीफ प्याज की बुवाई का समय अलग-अलग होता है। सामान्यतः जून के पहले सप्ताह से अगस्त के दूसरे सप्ताह तक इसकी बुवाई की जाती है। महाराष्ट्र में जून के मध्य से जुलाई के मध्य तक रोपाई की जाती है, जबकि अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में अगस्त के दूसरे पखवाड़े में रोपाई को अधिक उपयुक्त माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार अगस्त के दूसरे पखवाड़े में रोपी गई फसल से कई परिस्थितियों में बेहतर उत्पादन प्राप्त होता है।

सिंचाई का रखें विशेष ध्यान

खरीफ प्याज की फसल को रबी प्याज की तुलना में कम सिंचाई की आवश्यकता होती है। फसल की अच्छी वृद्धि और कंद विकास के लिए मिट्टी में पर्याप्त नमी बनाए रखने हेतु आवश्यकता अनुसार हल्की सिंचाई करनी चाहिए। फसल पकने पर तथा कटाई से लगभग 10 से 15 दिन पहले सिंचाई बंद कर देनी चाहिए। इससे भंडारण के दौरान प्याज के सड़ने की संभावना कम हो जाती है और उसकी गुणवत्ता भी बेहतर बनी रहती है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान वैज्ञानिक सलाह के अनुसार खरीफ प्याज की खेती करें तो उन्हें बेहतर उत्पादन के साथ अधिक लाभ मिल सकता है। साथ ही बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ने से कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है।

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