नई दिल्ली में सोमवार को खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग, भारत सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सचिवों और भारतीय खाद्य निगम (FCI) के अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक आयोजित की। इस बैठक की अध्यक्षता विभाग के सचिव संजीव चोपड़ा ने की। बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी खरीफ मार्केटिंग सीजन (KMS) 2025-26 के दौरान धान और अन्य अनाजों की खरीद की व्यवस्था को अंतिम रूप देना था।
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, खरीफ मार्केटिंग सीजन 2025-26 में धान की खरीद का अनुमान चावल के संदर्भ में 463.50 लाख मीट्रिक टन (LMT) और मोटे अनाज/बाजरा (श्री अन्न) की खरीद का अनुमान 19.19 लाख मीट्रिक टन लगाया गया है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह दी गई कि वे फसल विविधीकरण और पोषण सुरक्षा बढ़ाने के लिए विशेष रूप से बाजरे की खरीद पर जोर दें।
बैठक के दौरान कई प्रमुख मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। इसमें धान की मिलिंग अवधि को पोर्टल के माध्यम से ट्रैक और निपटाने, मोबाइल ऐप के जरिए धान का फिजिकल वेरिफिकेशन, स्मार्ट पीडीएस और अन्न मित्र योजनाएं, जूट बोरों की खरीद के लिए नकद ऋण सीमा का क्रियान्वयन, डिपो दर्पण की मॉनिटरिंग प्रणाली, खरीद केंद्रों में आधारभूत ढांचे को मजबूत बनाने और खाद्य सब्सिडी बिलों के निपटान के लिए स्कैन पोर्टल जैसे विषय शामिल थे।
इसके अलावा, बैठक में चावल मिलिंग परिवर्तन योजना पर भी जानकारी साझा की गई। इस योजना के तहत अब केवल 10% टूटे हुए चावल की कस्टम मिलिंग की जाएगी। इससे न सिर्फ चावल की गुणवत्ता बेहतर होगी बल्कि उपभोक्ताओं को पोषणयुक्त अनाज उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी।
बैठक में राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों के प्रधान सचिव/सचिव (खाद्य), भारतीय खाद्य निगम के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। केंद्र का कहना है कि खरीफ सीजन की तैयारी समय रहते पूरी कर लेने से किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य समय पर मिलेगा और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत अनाज की आपूर्ति भी सुचारू रूप से की जा सकेगी।
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