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व्यावसायिक स्तर पर बैंगन की खेती करते हुए रखें इन बातों का ध्यान

नई दिल्ली: बैंगन, जिसका वैज्ञानिक नाम Solanum melongena है, एक पौष्टिक और स्वादिष्ट सब्जी है, जोआयरन, कैल्शियम, फास्फोरस और विटामिन ए-बी-सी से भरपूर होती है। इसकी खेती उचित वैज्ञानिक विधियों के साथ की जानी चाहिए ताकि, किसानों को अधिक से अधिक मुनाफा हो सके।

खेत तैयारी:

   – पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करें और उसके बाद 3-4 बार हैरो या देशी हल से पाटा लगाएं।

   – खेत में सड़ी हुई गोबर की खाद 15 दिन पहले ही मिलाएं ताकि जमीन में पर्याप्त जीवांश रहे।

   – खेत में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की सही मात्रा में मिश्रित खाद डालें।

नर्सरी तैयारी:

   – बैंगन की फसल के लिए उपयुक्त बीज और संकर प्रजातियों का सही भाग में उपयोग करें। इसके लिए 400-500 ग्राम बीज और 300 ग्राम संकर प्रजातियों का चयन करें।

   – बीज को ट्राइकोडरमा से इलाज करें ताकि उन्हें किसी प्रकार के संक्रमण से बचाया जा सके।

   – नर्सरी में गहरी खुदाई करें, खरपतवारों को निकालें और सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाएं।

रोपण:

   – पौधों को धीरे-धीरे और हल्के हाथों से रोपें।

   – प्रति पौध के बीच 60 गुणा 60 सेमी की दूरी बनाएं।

   – रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें ताकि पौधों को आराम से पानी मिले।

सहारा और देखभाल:

   – फसल की हर 12-15 दिन में सिंचाई करें ताकि वे मुरझा न पाएं।

   – उचित रोगनाशकों का इस्तेमाल करें और समय-समय पर खेत की निराई-गुड़ाई करते रहें।

बैंगन की तुड़ाई:  

   – फल को पूरी तरह से पकने के बाद ही उनकी तुड़ाई करें।

   – उत्पादन की अच्छी गुणवत्ता और उच्च उपज के लिए उचित समय पर फसल की तुड़ाई आवश्यक है।

इस प्रकार, उचित देखभाल और विशेषज्ञों की सलाह के साथ किसान बैंगन की खेती से अच्छा लाभ उठा सकते हैं।

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