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फूलगोभी की अगेती खेती के दौरान इन बातों का ध्यान रखना है ज़रूरी

फूलगोभी की अगेती खेती से किसान शानदार मुनाफा कमा सकते हैं। यह भारत में प्रमुख सब्जियों में से एक है। इसके फूल का रंग सफेद होता है और इसे सब्जी, सूप और आचार आदि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसमें विटामिन सी, विटामिन के, फाइबर, फोलेट, विटामिन बी, पोटैशियम, प्रोटीन, फॉस्फोरस, मैग्नीज जैसे तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को कई लाभ पहुंचाते हैं।

फूलगोभी की अगेती खेती जुलाई-अगस्त में की जाती है। इस दौरान किसानों को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। जैसे – फूलगोभी की अगेती खेती के दौरान उचित जल निकास वाली बलुई दोमट मिट्टी का चयन करना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। फसल में जब फूल बन रहे होते हैं, तो उस समय जमीन में नमी का ध्यान रखना आवश्यक है। खरपतवारों की रोकथाम के लिए आवश्यकता अनुसार निराई-गुड़ाई करते रहना चाहिए। निराई-गुड़ाई ज्यादा गहरी न करें और खरपतवार को उखाड़ कर नष्ट कर दें। इस फसल को रोग लगने की काफी संभावना रहती है, इसलिए बीजों की बुवाई से पहले फफूंदनाशक से ज़रूर शोधन कर लेना चाहिए। फूलगोभी की खेती के दौरान एक हेक्टेयर खेत में बुवाई के लिए 450 ग्राम से 500 ग्राम बीज की नर्सरी तैयार करें। पंक्ति से पंक्ति के बीच 45 सेंटी मीटर और पौधे से पौधे के बीच 45 सेंटीमीटर की दूरी बनाए रखें।  फूलगोभी की रोपाई के तुरंत बाद सिंचाई करें। अधिक उपज लेने के लिए ज़मीन में पर्याप्त मात्रा में खाद डालें। एक हेक्टेयर जमीन में 35-40 क्विंटल गोबर की अच्छे तरीके से सड़ी हुई खाद डालें। खेत में उचित जल निकासी की व्यवस्था करें। बदलते मौसम में कीड़े और रोगों से फसल को नुकसान हो सकता है इसलिए फसल का खास खयाल रखें। अगेती फूलगोभी की खेती के लिए मिट्टी का पीएच 5.5 से 6.8 के बीच होना चाहिए। फूलगोभी की अगेती किस्म की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी वाली भूमि उपयुक्त होती है। सर्दियों में इसके खेत की सिंचाई 12 से 15 दिनों के अंतराल पर करें।

भारत में पॉलीहाउस में फूलगोभी की खेती लगभग सभी सीजन में की जा रही है और फूलगोभी की कई उन्नत किस्में भी विकसित की गई हैं। फूलगोभी की अगेती की खेती करने वाले किसान अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। यह एक उपयुक्त खेती विकल्प है जो कियानों को अधिक उत्पादन और लाभ प्रदान कर सकती है।

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