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धान की फसल को बचाने का देसी उपाय, पत्ता लपेटक कीट पर होगा नियंत्रण, रसायनों की नहीं जरूरत

धान की फसल को तैयार करने में किसान जी-जान से मेहनत करते हैं, लेकिन जब मेहनत की कमाई पर कीटों का हमला हो जाए तो न केवल उत्पादन घटता है, बल्कि लागत भी बढ़ जाती है। ऐसी ही एक गंभीर समस्या है पत्ता लपेटक कीट का हमला। यह छोटा सा कीट धान की कोमल पत्तियों को खाकर उन्हें कमजोर बना देता है, जिससे पौधे की बढ़वार रुक जाती है और फसल का विकास बाधित होता है।

अधिकतर किसान इस कीट से बचाव के लिए महंगे रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल करते हैं, जो न केवल आर्थिक रूप से नुकसानदायक हैं, बल्कि मिट्टी की उर्वरकता और पर्यावरण के लिए भी खतरनाक साबित होते हैं। हालांकि, एक आसान और देसी तरीका सामने आया है, जिससे किसान बिना किसी खर्च के इस कीट पर नियंत्रण पा सकते हैं। इस तकनीक में केवल एक 10 मीटर लंबी रस्सी का उपयोग किया जाता है।

कैसे किया जाता है उपाय

रस्सी के दोनों सिरों को पकड़कर उसे धान की पंक्तियों के ऊपर से सुबह के समय घुमाया जाता है। यह प्रक्रिया पूरे खेत में दोहराई जाती है। इस दौरान खेत में थोड़ा पानी भरा होना चाहिए ताकि पत्तियों से गिरने वाला कीट पानी में गिरकर खत्म हो जाए। यही प्रक्रिया शाम के वक्त भी की जाती है, क्योंकि यह कीट सुबह और शाम के समय सबसे अधिक सक्रिय होता है। यह उपाय न केवल सरल है, बल्कि बेहद कारगर भी साबित हो रहा है। इससे रसायनों पर खर्च नहीं होता और मिट्टी की गुणवत्ता भी बनी रहती है।

रासायनिक कीटनाशकों से होने वाले खतरे

रासायनिक कीटनाशकों के उपयोग से खेती की लागत तो बढ़ती ही है, साथ ही मिट्टी की सेहत भी बिगड़ती है। लंबे समय तक इनका इस्तेमाल करने से भूमि की उर्वरक क्षमता में गिरावट आती है और यह फसलों की गुणवत्ता को भी प्रभावित करता है। इसके अलावा, इनकी अवशिष्ट मात्रा मानव स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक हो सकती है।

इसी वजह से विशेषज्ञ यह सलाह देते हैं कि जब भी संभव हो, देसी और पर्यावरण के अनुकूल तरीकों से कीट नियंत्रण किया जाए। रस्सी से कीट नियंत्रण की यह विधि न सिर्फ किफायती है, बल्कि टिकाऊ और सुरक्षित भी है। इससे किसानों को आर्थिक राहत भी मिलती है और प्रकृति को नुकसान भी नहीं पहुंचता।

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