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सरकारी अनाज भंडारण में बढ़ोतरी, संकट के समय में अनाज की कमी नहीं होगी: FCI

देश में सरकारी अनाज भंडारण को लेकर एक सकारात्मक खबर सामने आई है। भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा जारी किए गए ताजे आंकड़ों के अनुसार, केंद्रीय पूल में चावल, गेहूं और धान का कुल भंडारण 1 फरवरी तक 83.78 मिलियन टन रहा, जबकि पिछले साल इस समय यह आंकड़ा 70.92 मिलियन टन था, जो 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है। इससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि केंद्र सरकार मई के अंत तक गेहूं खरीद की मात्रा को लेकर कोई बड़ा निर्णय ले सकती है।

गेहूं, चावल और धान के भंडारण में बढ़ोतरी
लैटेस्ट डेटा के अनुसार, FCI के पास 1 फरवरी को गेहूं का 16.17 मिलियन टन स्टॉक था, जो पिछले साल के समान समय में 13.27 मिलियन टन था, यानी इसमें 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। चावल और धान के भंडारण में भी 17 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है, जो इस समय 67.6 मिलियन टन तक पहुंच गया है, जबकि पिछले साल यह 57.66 मिलियन टन था। इसमें से 50.15 मिलियन टन धान है, जबकि बाकी का हिस्सा मिलिंग के बाद निकला चावल है।

OMSS के लिए नया नियम जारी
भारत सरकार के खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग ने ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) को लेकर नया नियम जारी किया है। इसके तहत राज्य सरकारें और कॉरपोरेशन 2250 रुपये प्रति क्विंटल की दर से चावल खरीद सकते हैं, लेकिन खरीद की कुल मात्रा 12 लाख मीट्रिक टन से अधिक नहीं हो सकती। सरकार महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ओपन मार्केट में चावल और गेहूं बेचने का कार्य कर रही है, और इसके लिए ओपन मार्केट सेल स्कीम चलाई गई है, जिसमें नीलामी के माध्यम से गेहूं और चावलों की बिक्री होती है।

संकट के समय में अनाज की कमी नहीं होगी
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, एक सरकारी सूत्र ने बताया कि पिछले कुछ समय से गेहूं का वितरण कुछ कम हुआ था और उसकी जगह चावल की समान मात्रा बांटी जा रही थी। हालांकि, यह स्थिति हमेशा बनी रहती है, लेकिन मई के अंत तक यह साफ हो जाएगा कि सरकार कितनी मात्रा में गेहूं खरीद सकेगी।

चावल के स्टॉक की स्थिति सरकार के लिए राहत देने वाली बनी हुई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि चावल, धान और गेहूं का स्टॉक सरकार के हिसाब से काफी आरामदायक स्थिति में है, जिससे यह सुनिश्चित हो सकेगा कि अगर गेहूं की अपेक्षाकृत कम खरीद होती है, तो भी किसी भी संकट से निपटने में कोई परेशानी नहीं होगी।

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