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केंद्रीय कैबिनेट के अहम फैसले: यूरिया प्लांट और डेयरी विकास पर सरकार का जोर, किसानों और पशुपालकों को मिलेगा फायदा

नई दिल्ली: केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में बुधवार को सरकार ने देश के किसानों और पशुपालकों के लिए दो बड़े फैसले लिए। इन फैसलों का सीधा असर कृषि और डेयरी क्षेत्र पर पड़ेगा और इससे लाखों किसानों को फायदा होगा। इन फैसलों में असम में यूरिया प्लांट की स्थापना और देश भर में डेयरी विकास को लेकर सरकार की नई योजनाओं की घोषणा शामिल है।

असम में यूरिया प्लांट की स्थापना को मंजूरी

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट ब्रीफिंग में बताया कि सरकार ने असम में यूरिया प्लांट की स्थापना को मंजूरी दे दी है। यह यूरिया प्लांट न केवल असम, बल्कि पूरे उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। इस परियोजना के तहत 10,601 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा और इसे जॉइंट वेंचर के माध्यम से चलाया जाएगा, जिसमें असम सरकार, बीवीएफसीएल, एचयूआरएल, एनएफएल और ऑयल इंडिया लिमिटेड शामिल होंगे।

इस प्लांट की स्थापना से यूरिया की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे उत्तर-पूर्वी राज्यों के किसानों को राहत मिलेगी। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल और आसपास के क्षेत्रों को भी इसका फायदा मिलेगा। खास बात यह है कि इस प्लांट से यूरिया का उत्पादन बढ़ने के साथ ही म्यांमार, भूटान और बांग्लादेश को भी यूरिया का निर्यात किया जा सकेगा।

गैस सप्लाई और रोजगार के नए अवसर

इस यूरिया प्लांट के लिए गैस की आवश्यकता होगी, जिसे उत्तर-पूर्वी राज्यों से मुहैया कराया जाएगा। इसके अलावा, गैस ग्रिड से भी यूरिया प्लांट को गैसी सप्लाई की जाएगी। इस प्लांट के निर्माण से रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे, खासकर असम और उत्तर-पूर्वी राज्यों में। परियोजना का निर्माण 48 महीने में पूरा होने का अनुमान है।

डेयरी विकास के लिए 1000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आवंटन

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कैबिनेट ने डेयरी विकास के लिए संशोधित राष्ट्रीय कार्यक्रम (NPDD) को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत सरकार ने डेयरी क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को आधुनिकीकरण और विस्तार के लिए 1000 करोड़ रुपये अतिरिक्त आवंटित किए हैं। इस परियोजना के लिए कुल बजट 2790 करोड़ रुपये होगा, जो 15वें वित्त आयोग (2021-22 से 2025-26) के दौरान उपलब्ध रहेगा।

डेयरी के क्षेत्र में सरकारी सहयोग और किसानों को लाभ

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस परियोजना का मुख्य फोकस कोऑपरेटिव के माध्यम से डेयरी विकास पर रहेगा। इस पहल के तहत किसानों को दूध उत्पादन कंपनियां स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अलावा, इस योजना का मुख्य उद्देश्य सरकारी खरीद को बढ़ाना और दूध के उत्पादों में वैल्यू एडीशन (मूल्य संवर्धन) करना है।

वैष्णव ने बताया कि पिछले दशक में कोऑपरेटिव द्वारा दूध उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है। 2013-14 में जहां 342 लाख किलो दूध प्रतिदिन उत्पादित होता था, वहीं 2023-24 में यह आंकड़ा बढ़कर 6628 लाख किलो प्रतिदिन पहुंच गया है। इसके अलावा, 2013-14 में कोऑपरेटिव के माध्यम से 471 लाख लीटर दूध की प्रोसेसिंग होती थी, जो अब बढ़कर 1074 लाख लीटर प्रति दिन हो गई है।

राष्ट्रीय गोकुल मिशन और कृत्रिम गर्भाधान पर जोर

इसके अलावा, कैबिनेट ने 2024-25 और 2025-26 के लिए संशोधित राष्ट्रीय गोकुल मिशन को लागू करने को मंजूरी दी है। इस मिशन का उद्देश्य कृत्रिम गर्भाधान (AI) और इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) के माध्यम से दूध उत्पादन की उत्पादकता में सुधार लाना है। इस मिशन से भारतीय दूध उद्योग में सुधार के साथ-साथ पशुपालन क्षेत्र को भी नई दिशा मिलेगी।

केंद्र सरकार की योजनाओं से किसानों और पशुपालकों को मिलेगा बड़ा लाभ

केंद्रीय कैबिनेट के ये फैसले देश के किसानों और पशुपालकों के लिए बेहद लाभकारी साबित होंगे। जहां एक ओर असम में यूरिया की उपलब्धता बढ़ने से उत्तर-पूर्वी राज्यों के किसानों को फायदा होगा, वहीं डेयरी विकास के लिए किए गए कदम से दूध उत्पादन और प्रसंस्करण के क्षेत्र में नया उजाला आएगा।

साथ ही, इन योजनाओं से रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। किसानों और पशुपालकों को सरकार की इन योजनाओं का सीधा लाभ मिलने के आसार हैं, जो कृषि और डेयरी क्षेत्र के विकास को नई गति देंगे।

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