नई दिल्ली: भारत ने गुरुवार को ब्रिटेन के साथ एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर किए, जिसे ‘व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता’ (CETA) के नाम से जाना जा रहा है। यह भारत का अब तक का 16वां व्यापार समझौता है, जो देश के बढ़ते वैश्विक व्यापार दृष्टिकोण और निवेश विस्तार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। यह समझौता केवल व्यापारिक टैरिफ में कटौती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों सहित कई क्षेत्रों में गहरी आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया है। इस एफटीए के माध्यम से भारत को ब्रिटेन जैसे परिपक्व और मूल्यवान बाजार तक आसान पहुंच मिलेगी।
क्या है एफटीए और इसके मुख्य उद्देश्य
मुक्त व्यापार समझौता एक ऐसा करार है, जिसमें भागीदार देश आपसी व्यापार में बाधा बनने वाले आयात शुल्क और गैर-टैरिफ प्रतिबंधों को या तो समाप्त करते हैं या काफी हद तक कम कर देते हैं। साथ ही यह सेवा क्षेत्र और निवेश के लिए आवश्यक नियमों को आसान बनाता है, जिससे कारोबारी माहौल बेहतर होता है। इस समझौते के माध्यम से दोनों देशों के बीच आयात-निर्यात, सेवा कारोबार, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। दुनियाभर में अभी 350 से अधिक एफटीए लागू हैं, और भारत भी धीरे-धीरे इस दिशा में अपने वैश्विक प्रभाव को मजबूत कर रहा है।
कृषि और खाद्य क्षेत्र को बड़ा लाभ
एफटीए के तहत भारत के कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य क्षेत्र को विशेष लाभ मिलने वाला है। कई प्रमुख उत्पादों पर ब्रिटेन द्वारा लगाए जाने वाले शुल्क पूरी तरह से खत्म कर दिए गए हैं, जिससे भारतीय निर्यातकों को भारी राहत मिलेगी।
प्रोसेस्ड फूड: पहले जिन उत्पादों पर 70 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगता था, अब वे लगभग 99.7 प्रतिशत टैरिफ लाइनों में शामिल होकर शून्य शुल्क के दायरे में आ गए हैं। इससे भारतीय प्रसंस्कृत खाद्य उद्योग को व्यापक वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलेगा।
समुद्री और पशु उत्पाद: इन क्षेत्रों में 20 प्रतिशत तक के शुल्क को खत्म कर दिया गया है, जिससे भारत के समुद्री भोजन, डेयरी और मांस उत्पादों के निर्यात को नई ऊंचाई मिल सकती है।
वनस्पति तेल और प्लांट बेस्ड उत्पाद: खाद्य तेल, तिलहन डेरिवेटिव और अन्य प्लांट-बेस्ड वस्तुओं पर टैरिफ खत्म होने से भारत के इन क्षेत्रों के निर्यात को काफी बढ़ावा मिलेगा।
भौगोलिक संकेत (GI) उत्पादों को पहचान: गोवा की फेनी, नासिक की शराब और केरल की ताड़ी जैसे विशिष्ट भारतीय पेयों को ब्रिटेन में GI टैग प्राप्त होगा और वहां की प्रमुख होटल और खुदरा श्रृंखलाओं में जगह मिलेगी।
कृषि राज्यों को सीधा फायदा
इस समझौते से भारत के कई राज्यों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। महाराष्ट्र को अंगूर और प्याज के निर्यात में बढ़त मिलेगी, गुजरात मूंगफली और कपास में बेहतर स्थिति में होगा, जबकि पंजाब और हरियाणा जैसे राज्य बासमती चावल के निर्यात में नई संभावनाएं देख सकते हैं। केरल के मसाले और पूर्वोत्तर राज्यों के बागवानी उत्पाद भी ब्रिटेन के बाजार में जगह बना सकते हैं।
भारत की एफटीए रणनीति और भविष्य की दिशा
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी एफटीए रणनीति को आक्रामक रूप से आगे बढ़ाया है। वर्ष 2014 के बाद से भारत ने मॉरीशस, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, EFTA और अब ब्रिटेन के साथ पांच व्यापार समझौते किए हैं। इससे पहले भारत ने श्रीलंका, सिंगापुर, मलेशिया, जापान, कोरिया और आसियान जैसे कई देशों और संगठनों के साथ भी एफटीए पर हस्ताक्षर किए हैं।
भारत अब अमेरिका, यूरोपीय संघ, इज़राइल, पेरू और ओमान जैसे देशों के साथ भी व्यापार समझौतों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है। इस तरह के समझौतों से भारत की अर्थव्यवस्था को वैश्विक व्यापार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलने की उम्मीद है। भारत और ब्रिटेन के बीच हुआ यह मुक्त व्यापार समझौता केवल व्यापारिक सीमा शुल्क में कटौती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को गहराई प्रदान करता है। विशेष रूप से भारत के कृषि, प्रसंस्कृत खाद्य, मत्स्य और पशुपालन क्षेत्रों के लिए यह समझौता एक सुनहरा अवसर साबित हो सकता है, जिससे देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आमदनी को बढ़ावा मिलेगा।

