नई दिल्ली: अगस्त में हुई भारी और लगातार बारिश ने खरीफ मूंग की अच्छी पैदावार की उम्मीदों को गहरा झटका दिया है। कर्नाटक और महाराष्ट्र के कई हिस्सों में कटाई के समय हुई बारिश से फसल को गंभीर नुकसान पहुंचा है। वहीं, कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सितंबर में भी बारिश का सिलसिला जारी रहा तो राजस्थान जैसे बड़े उत्पादक राज्य में भी मूंग की फसल प्रभावित हो सकती है। भारत दाल और अनाज संघ (IPGA) के चेयरमैन बिमल कोठारी का कहना है कि अभी सटीक नुकसान का आकलन करना जल्दबाजी होगी, लेकिन शुरुआती संकेत चिंताजनक हैं।
कर्नाटक के गडग, यादगीर, बागलकोट, धारवाड़ और कलबुर्गी जिलों में अगस्त के दौरान सामान्य से कई गुना ज्यादा बारिश हुई। गडग की मंडी में बुधवार को 10,930 क्विंटल मूंग की आवक दर्ज की गई, जहां दाम न्यूनतम 409 रुपये से लेकर अधिकतम 10,121 रुपये प्रति क्विंटल तक रहे। जबकि सरकार द्वारा तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 8,682 रुपये प्रति क्विंटल है। खराब क्वालिटी और अधिक नमी वाली मूंग की आपूर्ति बाजार में अधिक है, जबकि अच्छी क्वालिटी की फसल बेहद कम पहुंच रही है। बारिश ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। गडग और बागलकोट जिलों में क्रमशः 186% और 164% अधिक वर्षा दर्ज की गई, वहीं यादगीर और कलबुर्गी में भी सामान्य से करीब 85% ज्यादा बारिश हुई। कटाई के समय हुई इस बारिश ने पूरी फसल को प्रभावित कर दिया। किसानों को उम्मीद थी कि इस बार उन्हें बेहतर दाम मिलेगा, लेकिन खराब गुणवत्ता के कारण मंडियों में उन्हें एमएसपी से भी कम भाव मिल रहा है।
कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, खरीफ मूंग की बुवाई का क्षेत्र मामूली रूप से बढ़कर 34.11 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि पिछले साल यह 33.96 लाख हेक्टेयर था। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस वृद्धि का असर उत्पादन में नहीं दिखेगा क्योंकि कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात में बारिश ने पैदावार घटा दी है। पिछले खरीफ सीजन 2024 में मूंग का उत्पादन 17.47 लाख टन दर्ज हुआ था और साल 2024-25 में कुल उत्पादन 38.19 लाख टन रहा। लेकिन इस बार अधिक बारिश और खराब गुणवत्ता के कारण उत्पादन में गिरावट की आशंका जताई जा रही है। यदि सितंबर में भी बारिश जारी रहती है तो राजस्थान में मूंग की फसल को भी भारी नुकसान हो सकता है।

