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भारत में भेड़-बकरियों के लिए खतरनाक बीमारी PPR से निपटने के लिए सरकार की रणनीति

देशभर में भेड़-बकरियों में फैलने वाली खतरनाक और जानलेवा बीमारी पेस्ट डेस पेटिट्स रुमिनेंट्स (PPR) से निपटने के लिए केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियां सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। गोट एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो भेड़ और बकरियों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। हालांकि, राहत की बात यह है कि इस बीमारी की रोकथाम के लिए देश में वैक्सीनेशन उपलब्ध है।

PPR का भारत में बढ़ता खतरा

PPR को बकरी का प्लेग भी कहा जाता है, और यह एक पशुजन्य रोग है जो किसी एक संक्रमित भेड़ या बकरी से दूसरे पशु तक बहुत तेजी से फैलता है। यह वायरस खासकर बकरियों और भेड़ों की सांस, लार, नाक से निकलने वाले स्राव और दूषित उपकरणों के माध्यम से फैलता है।

इस बीमारी के लक्षणों में बुखार, आंखों और नाक से पानी बहना, सुस्ती, कमजोर होना और खाने से मुंह फेरना शामिल हैं। इसके बाद मुंह के अंदर मसूड़ों और जीभ पर लाल-लाल दाने और घाव बनने लगते हैं। इस बीमारी से प्रभावित पशु के स्वास्थ्य में और बिगाड़ आता है और अगर समय पर उपचार या टीकाकरण नहीं किया जाता है तो ये घाव सड़ने लगते हैं और पशु की मौत हो सकती है।

2030 तक PPR को जड़ से खत्म करने की योजना

भारत में PPR के नियंत्रण और उन्मूलन के लिए केंद्रीय पशुपालन और डेयरी मंत्रालय और वर्ल्ड ऑर्गेनाइजेशन ऑफ एनीमल हेल्थ (WOAH) के बीच लगातार बैठकें हो रही हैं। 17 फरवरी को कृषि भवन में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें मंत्रालय की सचिव अलका उपाध्याय और WOAH के प्रतिनिधिमंडल के साथ पीपीआर के उन्मूलन के लिए एक नई रणनीति पर चर्चा की गई। इस बैठक में 2030 तक PPR को भारत में जड़ से खत्म करने का लक्ष्य तय किया गया।

सचिव अलका उपाध्याय ने कहा, “इस मिशन की मदद से हम रणनीतिक टीकाकरण, निगरानी, निदान और मजबूत रोग प्रबंधन के माध्यम से PPR के नियंत्रण और उन्मूलन में भारत के प्रयासों का आकलन करेंगे।”

PPR से बचाव के उपाय और टीकाकरण की महत्व

PPR के प्रभाव से बचाव के लिए सबसे प्रभावी उपाय है नियमित टीकाकरण। भारतीय चिकित्सा शोध संस्थान (IVRI) द्वारा हाल ही में किए गए अनुसंधान में यह पाया गया है कि एक ही टीका अब PPR और शीप पॉक्स दोनों की रोकथाम के लिए प्रभावी साबित हो सकता है।

गोट एक्सपर्ट्स के अनुसार, जब भी भेड़-बकरी में PPR के लक्षण दिखाई दें, तो उस पशु को तुरंत बाकी स्वस्थ पशुओं से अलग कर देना चाहिए। प्रभावित पशु को ताजे पानी से अच्छी तरह से हाइड्रेटेड रखा जाना चाहिए, और उन्हें जल्दी से जल्दी चिकित्सा सहायता मिलनी चाहिए।

भेड़-बकरियों के लिए सलाह

अगर भेड़-बकरी में PPR के लक्षण दिखाई दें तो उसे शेड से तुरंत अलग कर देना चाहिए। पालतू पशुओं को इलाज के दौरान अन्य स्वस्थ पशुओं से दूर रखें, ताकि वायरस का प्रसार न हो। इसके अलावा, पशुपालकों को PPR से संबंधित सभी जानकारी और सावधानियों के बारे में जागरूक किया जा रहा है ताकि वे अपने जानवरों को सही समय पर टीकाकरण करवाकर इस बीमारी से बचा सकें।

भारत सरकार और संबंधित एजेंसियों की यह पहल, यदि सफल होती है, तो यह भेड़-बकरी पालकों के लिए एक बड़ी राहत साबित होगी और पशुधन की सुरक्षा को सुनिश्चित करेगी।

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