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खरीफ सीजन में दालों की पैदावार बढ़ाने के लिए सरकार का बड़ा कदम, 7 राज्यों में चलेगा बीज वितरण अभियान

नई दिल्ली: देश में खरीफ दलहन की खेती की शुरुआत हो चुकी है और किसान तेजी से खेतों में अरहर (तुअर) और उड़द जैसी दलहनी फसलों की बुआई की तैयारी में जुटे हुए हैं। इस बीच केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन 2025 में दालों की पैदावार को बढ़ावा देने और विदेशी आयात पर निर्भरता कम करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अंतर्गत उपभोक्ता मामले विभाग ने देश के सात राज्यों के एक दर्जन जिलों में बीज वितरण अभियान के जरिए दालों की खेती को बढ़ावा देने का ऐलान किया है। इस अभियान के तहत किसानों को अरहर और उड़द दाल की खेती के लिए उन्नत किस्म के बीज मुफ्त या रियायती दरों पर वितरित किए जाएंगे। इस योजना का उद्देश्य है देश में दालों की घरेलू उत्पादन क्षमता को बढ़ाना और लगातार बढ़ते आयात पर नियंत्रण पाना।

सात राज्यों में चलेगा बीज वितरण अभियान

उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने बताया कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, कर्नाटक, मणिपुर और त्रिपुरा के चयनित जिलों में यह अभियान चलाया जाएगा। सचिव ने जानकारी दी कि इस अभियान की जिम्मेदारी भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ लिमिटेड (NCCF) को दी गई है, जिसने तैयारी शुरू कर दी है। उन्होंने बताया कि बीते वर्ष झारखंड के दो जिलों में इस योजना का पायलट प्रोजेक्ट बेहद उत्साहजनक रहा था। इसके सफल परिणामों को देखते हुए इसे अब अन्य राज्यों में भी लागू किया जा रहा है।

इन जिलों के किसानों को मिलेगा लाभ

बीज वितरण अभियान के अंतर्गत झारखंड के पलामू, लातेहार और गढ़वा, उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर और ललितपुर, बिहार के गया, और कर्नाटक के विजयपुरा जिले शामिल हैं। इसके अलावा कर्नाटक में ऐसे जिलों को प्राथमिकता दी गई है जो वर्षा आधारित कृषि पर निर्भर हैं और जिन्हें ‘आकांक्षी ब्लॉक’ के रूप में NITI आयोग ने चिह्नित किया है।

MSP और सरकारी खरीद को लेकर बड़ी घोषणा

सचिव निधि खरे ने बताया कि बीज वितरण अभियान पर 1 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाएंगे। साथ ही बाजार में कीमतों में गिरावट आने की स्थिति में सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर 100 प्रतिशत खरीद सुनिश्चित करेगी। खरीफ विपणन सीजन 2025-26 के लिए अरहर का एमएसपी ₹28,000 प्रति क्विंटल और उड़द का एमएसपी ₹27,800 प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।

दालों के आयात पर लगाम जरूरी

भारत दालों की भारी मात्रा में आयात करता है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में भारत का दालों का आयात 47.38 लाख टन के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो वर्ष 2022-23 में 24.96 लाख टन था। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि देश में घरेलू उत्पादन की बढ़ोतरी कितनी जरूरी है। सरकार इसी के मद्देनज़र दालों के एमएसपी में लगातार बढ़ोतरी कर रही है ताकि किसानों को दलहन की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। इस अभियान के जरिए केंद्र सरकार जहां एक ओर किसानों को अधिक आय का अवसर देना चाहती है, वहीं दूसरी ओर घरेलू उपभोक्ताओं को दालों की कीमतों में स्थिरता और आपूर्ति में सुधार सुनिश्चित करना चाहती है। खरीफ सीजन के दौरान इस तरह का बीज वितरण अभियान देश में दालों की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकता है।

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