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धान की सरकारी खरीद: हरियाणा बना सबसे आगे, समय से पहले की खरीद ने दिलाई बढ़त

चंडीगढ़: धान की सरकारी खरीद को लेकर देश के विभिन्न राज्यों में धीमी गति की शिकायतों के बीच, हरियाणा ने इस मामले में अन्य राज्यों से अपनी स्थिति काफी मजबूत कर ली है। 9 नवंबर तक केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित 724.02 लाख मीट्रिक टन के राष्ट्रीय धान खरीद लक्ष्य का केवल 24% (175 लाख मीट्रिक टन) ही पूरा हो सका है। लेकिन हरियाणा ने अपना लक्ष्य 84% तक हासिल कर लिया है, जो कि अन्य राज्यों से काफी आगे है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अगुवाई में, राज्य ने फसल खरीद प्रक्रिया को तेज करने के लिए कई नए कदम उठाए, जो अब कारगर साबित हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बताया कि राज्य में धान खरीद प्रक्रिया 1 अक्टूबर से पहले ही 27 सितंबर से शुरू कर दी गई थी। ऐसा इसलिए किया गया ताकि मंडियों में जल्दी पहुंचने वाले किसानों को फसल बेचने के लिए प्रतीक्षा न करनी पड़े। उन्होंने इस साल राज्य में 60 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य तय किया था, जिसमें से अब तक 50.46 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद पूरी हो चुकी है। इस प्रयास के साथ किसानों के खातों में 72 घंटे के भीतर 11,296 करोड़ रुपये की राशि भी हस्तांतरित कर दी गई है।

खरीद प्रक्रिया को और सुगम बनाने के लिए हरियाणा स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड ने किसानों के लिए डिजिटल गेट पास जारी किए, ताकि मंडियों में प्रवेश के लिए लंबी कतारों से बचा जा सके। किसानों को फसल बेचने के बाद सीधे अपने खातों में पैसे मिलने से भी संतोषजनक परिणाम दिखे हैं।

किसानों और आढ़तियों के समर्थन में, राज्य ने प्रति क्विंटल आढ़तिया कमीशन को 46 रुपये से बढ़ाकर 55 रुपये कर दिया है। इस अतिरिक्त लागत को राज्य सरकार वहन कर रही है। इसके साथ ही, राईस मिलर्स को भी बोनस के रूप में 62.58 करोड़ रुपये दिए गए हैं ताकि कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) की डिलीवरी प्रक्रिया सुचारू रहे।

हरियाणा के पड़ोसी राज्य पंजाब ने इस सीजन में लक्ष्य का केवल 63% धान ही खरीदा है, जिससे वहां के किसान संगठन सरकार के खिलाफ विरोध कर रहे हैं। हरियाणा सरकार के समय पर शुरू किए गए प्रयास और सुचारू भुगतान प्रक्रियाओं ने न केवल राज्य के किसानों को राहत दी है, बल्कि अन्य राज्यों के किसानों का ध्यान भी आकर्षित किया है। हरियाणा का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है, जहां समय पर फसल खरीद और संतोषजनक भुगतान से किसानों को राहत मिलती है।

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