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कृषि क्षेत्र में उत्पादन से लेकर किसान सहायता तक बढ़ा सरकारी जोर

Government emphasis extended to farmer assistance

नई दिल्ली: देश की कृषि व्यवस्था में पिछले एक दशक के दौरान कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। केंद्र सरकार का कहना है कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला है और देश की करीब 46.1 प्रतिशत आबादी की आजीविका इससे जुड़ी हुई है। सरकार के अनुसार पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे संबद्ध क्षेत्रों में भी लगातार 5 से 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जा रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आय के नए स्रोत विकसित हुए हैं और किसानों के बीच खेती के आधुनिक तरीकों को अपनाने की गति बढ़ी है। पिछले दस वर्षों में सरकार की ओर से कृषि ऋण, फसल बीमा और बाजार तक किसानों की पहुंच बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल को भी बढ़ावा मिला है। खाद्य प्रसंस्करण, सहकारी समितियों, डेयरी और मत्स्य पालन में निवेश के जरिए कृषि से जुड़ी पूरी व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया गया है।

एक दशक में अनाज उत्पादन में बड़ी बढ़ोतरी

केंद्र सरकार के अनुसार वर्ष 2013-14 में देश में कुल अनाज उत्पादन 2650.05 लाख टन था। यह बढ़कर वर्ष 2025-26 में 3760.56 लाख टन तक पहुंच गया। सरकार इसे कृषि क्षेत्र में उत्पादन क्षमता बढ़ने और किसानों तक बेहतर सुविधाएं पहुंचने का परिणाम मानती है।

पशुपालन और मत्स्य पालन से बढ़े ग्रामीण आय के अवसर

खेती के साथ पशुपालन और मछली पालन को आय के अतिरिक्त स्रोत के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार के अनुसार इन क्षेत्रों में लगातार 5 से 6 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है। इससे ग्रामीण परिवारों को कृषि के अलावा भी नियमित आय के अवसर मिल रहे हैं।

न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बढ़ी सरकारी खरीद

किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद को महत्वपूर्ण सुरक्षा व्यवस्था के रूप में पेश किया जा रहा है। सरकार के अनुसार वर्ष 2004 से 2014 के बीच कुल 6980.7 लाख टन अनाज की खरीद की गई थी। वहीं वर्ष 2014 से 2026 के बीच यह आंकड़ा बढ़कर 1,2290.2 लाख टन हो गया। सरकार के दावों के मुताबिक इस अवधि में न्यूनतम समर्थन मूल्य के तहत किसानों को 26.32 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। धान और गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य में हुई बढ़ोतरी को भी किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।

किसानों को उपज का बेहतर मूल्य दिलाने पर जोर

सरकार का कहना है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद व्यवस्था किसानों को बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव से सुरक्षा प्रदान करती है। इससे किसानों को अपनी प्रमुख फसलों के लिए एक सुनिश्चित बाजार उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।

करोड़ों किसानों को सीधे वित्तीय सहायता का दावा

केंद्र सरकार के अनुसार प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के माध्यम से अब तक 23 किस्तों में 4.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जा चुकी है। सरकार इसे किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने वाली प्रमुख योजनाओं में शामिल करती है।

किसान क्रेडिट कार्ड से सस्ता ऋण

किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से किसानों को कृषि जरूरतों के लिए संस्थागत ऋण उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है। सरकार के अनुसार अगस्त 2026 तक देश में 7.28 करोड़ से अधिक सक्रिय किसान क्रेडिट कार्ड खाते हैं। इनके माध्यम से किसानों को अपेक्षाकृत कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।

फसल बीमा से किसानों को जोखिम से सुरक्षा

प्राकृतिक आपदाओं और मौसम संबंधी जोखिमों से किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना संचालित की जा रही है। सरकार के अनुसार योजना शुरू होने के बाद से अब तक 92.46 करोड़ से अधिक किसान आवेदन कर चुके हैं।

24 करोड़ से अधिक किसानों को मिला बीमा दावा

केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2025 तक लगभग 24.31 करोड़ किसानों को 1.96 लाख करोड़ रुपये से अधिक के बीमा दावों का भुगतान किया जा चुका है। सरकार का कहना है कि प्राकृतिक आपदा या फसल नुकसान की स्थिति में यह सहायता किसानों को आर्थिक संकट से उबरने में मदद करती है।

मिट्टी की सेहत सुधारने पर भी सरकार का जोर

कृषि उत्पादन को टिकाऊ बनाने के लिए मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। सरकार के अनुसार मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत अब तक 26.09 करोड़ से अधिक कार्ड जारी किए जा चुके हैं। इनके माध्यम से किसानों को अपनी मिट्टी की गुणवत्ता और उसमें मौजूद पोषक तत्वों की जानकारी मिलती है।

जैविक और प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा

केंद्र सरकार जैविक खेती और प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा देने के साथ सौर ऊर्जा से चलने वाले कृषि पंपों के इस्तेमाल को भी प्रोत्साहित कर रही है। सरकार का मानना है कि इससे खेती की लागत और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव को कम करने में मदद मिलेगी। केंद्र सरकार के अनुसार कृषि उत्पादन में वृद्धि, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद, प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता, संस्थागत ऋण, फसल बीमा और मिट्टी की सेहत सुधारने जैसी पहलों से भारतीय कृषि व्यवस्था को मजबूत आधार मिला है। साथ ही आधुनिक तकनीक और संबद्ध कृषि क्षेत्रों के विस्तार के जरिए किसानों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने का प्रयास जारी है।

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