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मध्यप्रदेश में बागवानी से किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

Gardening in mp

भोपाल: मध्यप्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने बागवानी फसलों को बढ़ावा देने की तैयारी तेज कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि कम जमीन में अधिक आय प्राप्त करने के लिए बागवानी फसलें सबसे प्रभावी माध्यम हैं और अधिक से अधिक किसानों को इससे जोड़ा जाना चाहिए। बुधवार को मंत्रालय में आयोजित उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की समीक्षा बैठक में उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पारंपरिक खेती के साथ फल, सब्जी, फूल, मसाला और औषधीय फसलों की ओर किसानों को प्रोत्साहित किया जाए।

प्राकृतिक खेती, निर्यात और बाजार विस्तार पर फोकस

मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक खाद और जैविक खेती को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य किसानों को तेज और स्थिर नकद आय उपलब्ध कराना है। राज्य पहले से ही मसाला उत्पादन में देश में अग्रणी है, जबकि फूल और सब्जी उत्पादन में तीसरे तथा फल उत्पादन में चौथे स्थान पर है। अब सरकार उत्पादन के साथ-साथ ब्रांडिंग और निर्यात बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती मांग को देखते हुए आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और नए बाजार तलाशने की योजना बनाई जा रही है। कई उत्पादों को भौगोलिक संकेतक दर्जा दिलाने की प्रक्रिया भी जारी है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिल सके।

उज्जैन में फ्लोरीकल्चर केंद्र की स्थापना

सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए उज्जैन में 19 एकड़ भूमि पर फ्लोरीकल्चर उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया जाएगा। इससे फूलों की खेती को नई दिशा मिलेगी और किसानों को आधुनिक तकनीक का लाभ प्राप्त होगा।

2030 तक बड़ा लक्ष्य और नई योजनाएं

राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक बागवानी क्षेत्र का रकबा 30 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए उद्यानिकी प्रोत्साहन एजेंसी बनाने की प्रक्रिया चल रही है, जो किसानों को उत्पादन से लेकर बाजार तक सहायता प्रदान करेगी। प्रदेश के 14 जिलों में मखाना खेती को भी बढ़ावा दिया जा रहा है और इस वर्ष इसका रकबा 85 हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना के अंतर्गत किसानों को 40 प्रतिशत तक अनुदान सहायता दी जा रही है।

फसल महोत्सव और आधुनिक सुविधाओं पर जोर

राज्य में विभिन्न फसलों के महोत्सव आयोजित किए जाएंगे, जिससे किसानों को बाजार और पहचान दोनों मिलेंगी। भोपाल में आम महोत्सव, खरगोन में मिर्च महोत्सव, बुरहानपुर में केला महोत्सव और इंदौर में सब्जी महोत्सव आयोजित होंगे। इसके साथ ही 40 नर्सरियों को उच्च तकनीक से सुसज्जित किया जा रहा है और 15 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई का विस्तार किया जा रहा है। सागर और देवास में स्मार्ट बीज फार्म भी विकसित किए जा रहे हैं।

खाद्य प्रसंस्करण से बढ़ेगी आय

खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देकर किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने की योजना बनाई गई है। इसके तहत छोटे स्तर पर प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना पर जोर दिया जा रहा है, ताकि गांव स्तर पर ही मूल्य संवर्धन हो सके। सरकार का उद्देश्य खेती को लाभकारी और टिकाऊ बनाना है। इसके लिए आधुनिक तकनीक, बेहतर बीज, सिंचाई सुविधाएं और मजबूत बाजार उपलब्ध कराकर किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

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