लखनऊ: उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को मजबूत बनाकर किसानों की आय बढ़ाने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि यह क्षेत्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में सहायक सिद्ध होगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति
उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति के तहत मिलने वाले प्रोत्साहन और अनुदानों का व्यापक प्रचार किया जाए, ताकि अधिक से अधिक निवेश आकर्षित हो सके। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योगों की स्थापना होगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
निवेश प्रस्तावों को मिली मंजूरी
अपर मुख्य सचिव बीएल मीणा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में निवेश प्रस्तावों की समीक्षा की गई। इस दौरान कई परियोजनाओं को निर्धारित शर्तों के साथ स्वीकृति के लिए आगे बढ़ाया गया, जिससे प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
आधुनिक इकाइयों की स्थापना से बढ़ेगा मूल्य संवर्धन
स्वीकृत परियोजनाओं में सौर ऊर्जा आधारित संयंत्र, आधुनिक चावल मिल, मसाला और कृषि उत्पाद प्रसंस्करण इकाइयां तथा पैकेज्ड खाद्य उत्पाद निर्माण इकाइयां शामिल हैं। इनसे उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और किसानों के उत्पादों का बेहतर मूल्य मिल सकेगा।
सौर ऊर्जा से घटेगी लागत
सरकार औद्योगिक विकास के साथ-साथ हरित ऊर्जा को भी बढ़ावा दे रही है। सौर ऊर्जा आधारित इकाइयों के माध्यम से ऊर्जा लागत कम होगी और उद्योग अधिक आत्मनिर्भर बनेंगे। इससे पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में भी मदद मिलेगी।
सैकड़ों इकाइयों को मिल चुका लाभ
अधिकारियों के अनुसार अब तक सैकड़ों इकाइयों को इस योजना का लाभ मिल चुका है, जिनमें बड़ी संख्या में सौर ऊर्जा संयंत्र भी स्थापित किए जा चुके हैं। विभिन्न प्रकार के उद्योगों में सौर ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे उत्पादन प्रक्रिया अधिक किफायती और टिकाऊ बन सके। खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से उत्तर प्रदेश में कृषि आधारित उद्योगों को नई गति मिलने की उम्मीद है, जिससे किसानों की आय बढ़ने के साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।
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