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आम को गुच्छा रोग से बचाने के लिए समय रहते अपनाएँ ये उपाय

नई दिल्ली: आम उत्पादन के मामले में भारत विश्व भर में शीर्ष स्थान पर है। हमारे देश में फलों की खेती करने वाले किसान आम का उत्पादन प्रमुख रूप से करते हैं। इस फल की मांग न केवल हमारे देश बल्कि विश्व के अनेक देशों में भी बड़े पैमाने पर है। अच्छी गुणवत्ता वाले आम प्राप्त करने के लिए फल के विकास काल के दौरान उचित देखभाल की आवश्यकता होती है। क्योंकि यह वह समय होता है जब विभिन्न प्रकार की व्याधियाँ व कीट आदि आम के मंजर व फल आदि पर हमला करते हैं।

गुच्छा रोग एक ऐसा रोग है जो आम के उत्पादन में भारी गिरावट कर देता है। इस रोग के प्रकोप से आम की टहनियाँ तथा पत्तियाँ छोटी होकर गुच्छा बना लेती हैं। इससे पौधे की बढ़वार रुक जाती है। अगर गुच्छा रोग का समय रहते उपचार ना किया जाए तो आम के उत्पादन में 30 प्रतिशत तक कमी हो सकती है।

गुच्छा रोग का प्रकोप आमतौर पर उत्तर भारत में अधिक देखने को मिलता है। इसका मुख्य कारण है यहाँ की जलवायु। उत्तर भारत अक्टूबर महीने से लेकर फरवरी महीने तक जलवायु अपेक्षाकृत कम उष्ण होती है। इस वजह से आम के पौधों में इस समयावधि में गुच्छा रोग अधिक फैलता है। जबकि दक्षिणी भारत के अधिक उष्ण वातावरण में आमों के पौधों में जिफेरीन नामक एक द्रव्य बनते हैं, जो वृक्ष को मालफॉरमेशन नामक विकृति से बचाते हैं। इस विकृति के कारण वृक्ष में इथिलिन नामक हार्मोन का स्तर अधिक हो जाता हैं, जो इस रोग को और अधिक बढ़ावा देता है।

अब सवाल यह उठता है कि गुच्छा रोग आखिर फैलता कैसे है? दरअसल, आम के वृक्ष पर एक बहुत सूक्ष्म मकड़ी पाई जाती है, जो धीरे-धीरे सबग्लुटिनन्स नाम के एक कवक को पूरे वृक्ष पर फैला देती है। इस वजह से गुच्छा रोग की उत्पत्ति होती है। फिर एक समय ऐसा आता है जब गुच्छा रोग आम की समूची पैदावार को प्रभावित कर देता है। आम की पैदावार को गुच्छा रोग से बचाने के लिए आप इन उपायों को अपनाकर भावी नुकसान से बच सकते हैं:

गुच्छा रोग पर नियंत्रण के लिए आम के पेड़ पर मेंजिफेरिन का छिड़काव करें। साथ ही मकड़ीनाशक कीटनाशी का प्रयोग भी अवश्य करें।

इसके अलावा गुच्छा रोग से प्रभावित होने पर आम के पेड़ पर कॉपर और जिंक नामक तत्वों का फफुंदनाशक की तरह उपयोग करें। यह काफी कारगर साबित होता है।

किसान मित्रों, गुच्छा रोग से बचाव के लिए मई के महीने में फल तोड़ने के बाद वृक्ष पर लगे हुए सभी गुच्छों को काट कर जला दें और हर महीने फलों पर नजर रखें।

इस रोग पर पूरे नियंत्रण के लिए आम के वृक्ष पर लगे एक-एक विकृत गुच्छों को काटकर नष्ट कर देना चाहिए, ताकि रोग के कारक फफूंद फिर नहीं पनप पाएँ।

यह बीमारी नवंबर से फरवरी महीने तक कम उष्णता होने की वजह से पनपती है। इसलिए विशेष रूप से इस दौरान खराब गुच्छों को काटकर अवश्य नष्ट कर दें।

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