हिसार: अल नीनो की चर्चाओं के बीच पशुपालन क्षेत्र में हरे चारे की कमी को लेकर चिंता बढ़ रही है। पहले से ही हरे चारे के दाम 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं, जिससे पशुपालकों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है। ऐसे में अब वैज्ञानिकों ने जई की एक नई उन्नत किस्म विकसित की है, जो सालभर हरा चारा उपलब्ध कराने में मददगार साबित हो सकती है।
सालभर मिलेगा हरा चारा, बढ़ेगा दूध उत्पादन
चारा विशेषज्ञों के अनुसार जई की नई किस्म एचएफओ 906 पशुओं के लिए अत्यंत पौष्टिक है। इसमें प्रोटीन की मात्रा अधिक है और यह आसानी से पचने योग्य है, जिससे पशुओं के शारीरिक विकास में सुधार होता है और दूध उत्पादन भी बढ़ने की संभावना रहती है। देश में हरे और सूखे चारे की कमी को देखते हुए इस किस्म को विकसित किया गया है, क्योंकि चारे की कमी का सीधा असर पशुओं की उत्पादकता पर पड़ता है।
अधिक पैदावार देने वाली उन्नत किस्म
वैज्ञानिकों के अनुसार यह नई किस्म पारंपरिक किस्मों की तुलना में अधिक उत्पादन देती है। यह राष्ट्रीय स्तर पर प्रचलित अन्य किस्मों से लगभग 14 प्रतिशत तक अधिक हरा चारा उपलब्ध करा सकती है। साथ ही यह एक कटाई वाली किस्म है, जिससे इसकी देखभाल भी आसान होती है।
उत्तर भारत के राज्यों में होगा अधिक लाभ
विशेषज्ञों का कहना है कि यह किस्म खासतौर पर उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र के राज्यों जैसे हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तराखंड के लिए उपयुक्त है। समय पर बुवाई करने पर यह किस्म बेहतर परिणाम देती है और पशुपालकों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है।
पशुपालन में आएगा बड़ा बदलाव
वैज्ञानिकों का दावा है कि यदि इस किस्म को बड़े पैमाने पर अपनाया गया, तो यह पशुपालन के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है। इससे न केवल चारे की समस्या कम होगी, बल्कि पशुओं की उत्पादकता और किसानों की आय में भी वृद्धि हो सकती है। जई की यह नई किस्म हरे चारे की बढ़ती कीमत और कमी की समस्या का एक स्थायी समाधान बनकर उभर सकती है, जिससे पशुपालकों को लंबे समय तक लाभ मिलने की उम्मीद है।
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