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बाढ़ और सूखे पर किसानों के लिए उत्तर प्रदेश सरकार का निर्देश

Flood

लखनऊ, 21 जुलाई 2026: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि बाढ़ हो या सूखा, किसानों की फसलों और आमजन की आजीविका की सुरक्षा प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राहत एवं बचाव कार्य पूरी संवेदनशीलता, तत्परता और समन्वय के साथ संचालित किए जाएं, ताकि प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति तक समयबद्ध सहायता पहुंच सके। अनियमित वर्षा से उत्पन्न सूखे और संभावित बाढ़ की स्थिति की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक जनपद की परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए राहत और बचाव की रणनीति भी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार तैयार की जाए।

कम वर्षा वाले क्षेत्रों में खेती प्रभावित न होने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन जनपदों में सामान्य से कम वर्षा हुई है, वहां खेती की गतिविधियां किसी भी स्थिति में प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसके लिए नहरों, जलाशयों, राजकीय नलकूपों और अन्य उपलब्ध सिंचाई संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने बोआई और सिंचाई की स्थिति की नियमित समीक्षा करने तथा किसानों को समय पर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

कृषि और सिंचाई विभाग मिलकर बनाएंगे कार्ययोजना

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जहां वर्षा की कमी के कारण बोआई प्रभावित होने की आशंका हो, वहां कृषि और सिंचाई विभाग संयुक्त कार्ययोजना बनाकर तत्काल राहत उपलब्ध कराएं, ताकि किसानों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।

चौबीसों घंटे होगी स्थिति की निगरानी

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि राहत आयुक्त कार्यालय का नियंत्रण कक्ष चौबीसों घंटे सक्रिय रहे। प्रत्येक घंटे की अद्यतन जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय, पुलिस महानिदेशक कार्यालय और संबंधित राहत एजेंसियों तक पहुंचाई जाए। राज्य स्तरीय डैशबोर्ड पर सभी जनपदों की स्थिति नियमित रूप से अद्यतन की जाए, जिससे समय पर आवश्यक निर्णय लिए जा सकें।

राहत शिविरों में सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ प्रभावित और संवेदनशील जनपदों में तीन दिनों के भीतर सभी राहत शिविर पूरी तरह तैयार कर लिए जाएं। राहत शिविरों में पौष्टिक भोजन, स्वच्छ पेयजल, चिकित्सा सुविधा, स्वच्छता और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। बच्चों के लिए दुग्ध उपलब्ध कराया जाए तथा महिलाओं, बच्चों, वृद्धजनों, दिव्यांगजनों और गर्भवती महिलाओं की विशेष आवश्यकताओं का ध्यान रखा जाए।

आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर जोर

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि आवश्यकता वाले क्षेत्रों में सामान्य नावों के साथ बड़ी नौकाओं की भी व्यवस्था की जाए। प्रशिक्षित आपदा सहयोगियों की सेवाओं का व्यापक उपयोग किया जाए तथा प्रत्येक जिलाधिकारी स्वयं राहत एवं बचाव कार्यों की नियमित निगरानी करें। विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए संभावित आपदाओं से पहले ही आवश्यक कदम उठाए जाएं।

तटबंधों की सुरक्षा और संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष नजर

मुख्यमंत्री ने तटबंधों की चौबीसों घंटे निगरानी और नियमित गश्त के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जहां कटान या रिसाव की आशंका हो, वहां तत्काल सुरक्षात्मक कार्यवाही की जाए। राहत सामग्री, नाव, मोटर नौका और अन्य आवश्यक संसाधनों से जुड़ी सभी प्रशासनिक प्रक्रियाएं समय रहते पूरी कर ली जाएं, ताकि आपात स्थिति में राहत कार्य प्रभावित न हों।

पशुधन की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ संभावित क्षेत्रों में पशुओं को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए। जलभराव वाले क्षेत्रों में पशुओं को न रखा जाए तथा मौसम के अनुसार संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए उनका समयबद्ध टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए।

बाढ़ प्रभावित जनपदों में राहत तैयारियां पूरी

बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि वर्तमान में प्रदेश के चार जनपदों की चार तहसीलों के बयालीस गांव प्रभावित हैं। राहत एवं बचाव कार्यों के लिए बड़ी संख्या में बाढ़ चौकियां, चिकित्सा दल, नावें, मोटर नौकाएं और शरणालय सक्रिय किए गए हैं। प्रभावित परिवारों को निर्धारित नियमों के अनुसार सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

इसके साथ ही बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील चवालीस जनपदों में व्यापक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। राहत शरणालयों, नियंत्रण कक्षों, आपदा राहत बलों और पशु शरणालयों की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित कर दी गई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित राहत और बचाव कार्य किए जा सकें।

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