नई दिल्ली: भारत में मछली पालन का क्षेत्र लगातार विस्तार की ओर है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश का कुल मछली उत्पादन 195 लाख टन तक पहुंच चुका है, जिसमें से 75 प्रतिशत हिस्सा इनलैंड फिशरीज यानी तालाब, जलाशयों और कृत्रिम जल स्रोतों से आता है। मछली केवल घरेलू खपत तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्यात के मामले में भी बड़ी भूमिका निभा रही है। भारत हर साल करीब 60 हजार करोड़ रुपये मूल्य की मछली का निर्यात करता है और इसमें झींगा की हिस्सेदारी 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक है।
झींगा उत्पादन के मामले में अब तक गुजरात, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे तटीय राज्य ही आगे रहे हैं, लेकिन अब उत्तर भारत के राज्य भी इस दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। सरकारी रिपोर्टों में स्पष्ट किया गया है कि हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में मौजूद खारी मिट्टी और जलवायु झींगा पालन के लिए उपयुक्त है। इन राज्यों के मछली पालक भी बड़े पैमाने पर झींगा उत्पादन शुरू करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उनका कहना है कि इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार को कुछ बुनियादी ढांचागत सुधार करने होंगे।
उत्तर भारत के मछली पालकों ने झींगा पालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार से कई अहम मांगें रखी हैं। उनका कहना है कि झींगा पालन की स्थापना लागत काफी अधिक है, जबकि सब्सिडी कवरेज सीमित है। खारे पानी में खेती के लिए वर्तमान में दो हेक्टेयर की सीमा तय है, जिसे बढ़ाकर पांच हेक्टेयर किया जाना चाहिए। इसके अलावा मिट्टी और पानी में खारापन एक समान नहीं रहता, जमीन के पट्टे की दरें अधिक हैं और उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की भी भारी कमी है। किसानों को बाजार, कोल्ड स्टोरेज, आपूर्ति शृंखला और लागत से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जिससे उत्पादन तो होता है, लेकिन निवेश पर पर्याप्त रिटर्न नहीं मिल पाता।
हाल ही में केंद्रीय मत्स्य विभाग के साथ हुई बैठक में किसानों ने कहा कि झींगा पालन को मजबूती देने के लिए केंद्र सरकार को ज्यादा मदद करनी चाहिए। किसानों की मांग है कि जलीय कृषि के लिए इकाई लागत 25 लाख रुपये की जाए, क्षेत्र सीमा को दो से बढ़ाकर पांच हेक्टेयर किया जाए और पॉलीथीन लाइनिंग पर दी जाने वाली सब्सिडी को भी बढ़ाया जाए। साथ ही हरियाणा के सिरसा में एक एकीकृत एक्वा पार्क की स्थापना और सप्लाई चैन को बेहतर बनाने की सिफारिश की गई है।
ब्रैकिश वॉटर एक्वाकल्चर पर काम करने वाली केंद्रीय संस्था CIBA की रिपोर्ट बताती है कि देश में करीब 8.62 मिलियन हेक्टेयर खारी मिट्टी मौजूद है, लेकिन फिलहाल सिर्फ 1.28 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही जलीय कृषि की जा रही है। सरकार अब इस क्षेत्र को एक लाख हेक्टेयर और बढ़ाना चाहती है, जिससे झींगा उत्पादन में बड़ा इजाफा हो सके।
फिलहाल उत्तर भारत के चारों राज्यों में झींगा उत्पादन सीमित पैमाने पर हो रहा है। हरियाणा में करीब 2,942 एकड़, पंजाब में 1,200 एकड़, राजस्थान में 1,000 एकड़ और उत्तर प्रदेश में लगभग 20–25 एकड़ क्षेत्र में झींगा पालन किया जा रहा है। हालांकि हरियाणा ने इस दिशा में बड़ी पहल की है और 1,200 एकड़ अतिरिक्त जमीन को झींगा पालन के लिए चिह्नित किया है।
सरकार की कोशिश है कि झींगा को केवल तटीय क्षेत्रों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उत्तर भारत को भी इस उत्पादन में भागीदार बनाया जाए। इससे न केवल देश का निर्यात बढ़ेगा, बल्कि लाखों किसानों और ग्रामीण युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे। मछली पालन के क्षेत्र में यह बदलाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा दे सकता है और भारत को झींगा निर्यात में वैश्विक स्तर पर और भी प्रतिस्पर्धी बना सकता है।

