मुंबई: महाराष्ट्र में मछली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार नई पहल करने जा रही है। इसके तहत सरकार आधुनिक तकनीक का सहारा लेते हुए तालाबों और जलाशयों की विस्तृत जानकारी एकत्र करेगी। राज्य के मत्स्य विकास मंत्री नितेश राणे ने विधानसभा में बजट मांगों पर चर्चा के दौरान यह जानकारी दी। सरकार का उद्देश्य राज्य के जल संसाधनों का बेहतर उपयोग कर मछली पालन को मजबूत आर्थिक गतिविधि के रूप में विकसित करना है।
तालाबों की जानकारी जुटाने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग
मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार आधुनिक संगणकीय साधनों की सहायता से राज्य के सभी तालाबों और जल निकायों की विस्तृत मानचित्रण प्रक्रिया शुरू कर रही है। इस प्रक्रिया के माध्यम से यह पता लगाया जाएगा कि किन तालाबों में कितनी मात्रा में मछली उत्पादन हो रहा है और उनकी वास्तविक उत्पादन क्षमता क्या है। वर्तमान समय में राज्य के कई तालाबों से जुड़ा सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, विशेष रूप से विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्रों में। इन इलाकों में बड़ी संख्या में तालाब पिछले तीन से चार दशकों से विभिन्न संस्थाओं को आवंटित किए गए हैं। हालांकि इन तालाबों में वास्तविक उत्पादन की जानकारी सीमित होने के कारण उनके बेहतर उपयोग में बाधा आ रही है। नई व्यवस्था के माध्यम से प्रत्येक तालाब की स्थिति, पानी की उपलब्धता और उत्पादन क्षमता का विस्तृत विवरण सामने आ सकेगा।
उत्पादन बढ़ाने के लिए दी जाएगी तकनीकी सहायता
मंत्री ने कहा कि जब तालाबों से जुड़ा सटीक आंकड़ा प्राप्त हो जाएगा, तब सरकार उन संस्थाओं और व्यक्तियों से संपर्क करेगी जो इन तालाबों का संचालन कर रहे हैं। इसके बाद उन्हें मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए आवश्यक तकनीकी और अन्य सहयोग प्रदान किया जाएगा। सरकार तालाबों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए बुनियादी समस्याओं को दूर करने पर भी ध्यान दे रही है। कई तालाबों में लंबे समय से गाद जमा हो जाने के कारण उनकी जल धारण क्षमता कम हो गई है। मंत्री के अनुसार यदि इन तालाबों से गाद हटाई जाए तो मछली उत्पादन में लगभग बीस से तीस प्रतिशत तक वृद्धि संभव है।
देश में ताज़े पानी की मछली उत्पादन में पिछड़ रहा राज्य
इतने व्यापक जल संसाधनों के बावजूद महाराष्ट्र ताज़े पानी की मछली उत्पादन में देश में सोलहवें स्थान पर है। सरकार का लक्ष्य इस स्थिति को सुधारना और मछली पालन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना शुरू की है। इस योजना के अंतर्गत कुल अट्ठाईस नई पहलें शुरू की जाएंगी, जिनमें छह राज्य स्तर की और उन्नीस जिला स्तर की योजनाएं शामिल हैं। इन पहलों का उद्देश्य मछली उत्पादन बढ़ाना, आधारभूत संरचना को मजबूत करना और मछली पालन करने वाले लोगों को आर्थिक व तकनीकी सहयोग प्रदान करना है।
मछली पालन के लिए बड़ा बजट निर्धारित
सरकार ने इन योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए लगभग एक हजार चौबीस करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। मंत्री ने यह भी बताया कि पिछले एक वर्ष में महाराष्ट्र में मछली पालन को कृषि का दर्जा दिया गया है, जिससे मछली पालकों को अब वही सुविधाएं और सरकारी लाभ मिल सकेंगे जो किसानों को प्राप्त होते हैं। केंद्र सरकार की एक रिपोर्ट के अनुसार हाल के वर्षों में महाराष्ट्र में मछली उत्पादन में लगभग सैंतालीस प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार का मानना है कि यदि तालाबों का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन किया जाए और आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ाया जाए तो मछली पालन ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय का बड़ा स्रोत बन सकता है।
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