Site icon Agriculture| Kheti| Krishi| Farm| Farmer| Agriculture| News

केज कल्चर से मछली पालन: सरकारें दे रहीं सब्सिडी, 21 राज्यों में बन चुके 55 हजार से ज्यादा केज

नई दिल्ली: देश में मछली पालन को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने की दिशा में केज कल्चर एक कारगर विकल्प बनकर उभर रहा है। यह तकनीक उन जलाशयों में मछली पालन को संभव बनाती है, जहां पानी तो है लेकिन पारंपरिक तालाब जैसी व्यवस्था नहीं है। भारत में फिलहाल करीब 19 हजार ऐसे जलाशय हैं, जहां केज कल्चर के जरिए मछली पालन किया जा सकता है। यह तरीका तालाब के मुकाबले कहीं ज्यादा सस्ता और कम जगह में अधिक उत्पादन देने वाला है। हालांकि, देश में अभी तक इसका उपयोग सीमित रूप से ही हो रहा है, लेकिन अब केंद्र और राज्य सरकारें इसे बढ़ावा देने के लिए संयुक्त रूप से प्रयास कर रही हैं।

केज कल्चर तकनीक के तहत जलाशयों में लोहे या प्लास्टिक से बना एक जालीनुमा पिंजरा डाला जाता है, जिसमें मछलियों को रखा जाता है और वहीं पर उन्हें फीड दिया जाता है। इस तकनीक की खास बात यह है कि बहुत कम जगह में चार से पांच टन तक मछली उत्पादन संभव हो जाता है। इससे न सिर्फ उत्पादन लागत घटती है, बल्कि कम समय में अधिक मुनाफा भी मिलता है।

सरकार इस तकनीक को अपनाने वालों को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत विभिन्न स्तरों पर सहायता दे रही है। केंद्र और राज्य दोनों सरकारें केज बनाने, मछली का बीज खरीदने, फीड देने और यहां तक कि मरम्मत के खर्च में भी सब्सिडी उपलब्ध करवा रही हैं। एक केज की लागत लगभग तीन लाख रुपये आती है। सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को प्रति केज 1.20 लाख रुपये और आरक्षित वर्ग को 1.80 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है। एक व्यक्ति अधिकतम पांच केज के लिए सहायता ले सकता है, जबकि कम से कम 10 सदस्यों वाले समूह को बीस केज तक की मदद मिलती है।

केज स्थापित करने के लिए उस जलाशय में पूरे साल कम से कम आठ मीटर पानी की गहराई होना जरूरी है और संबंधित राज्य या केंद्रशासित क्षेत्र से अनुमति लेना भी आवश्यक है। यदि विदेशी मछली प्रजातियों का इस्तेमाल हो तो उसके लिए विशेष सरकारी स्वीकृति जरूरी है। सब्सिडी के लिए लाभार्थियों को तकनीकी, वित्तीय और परिणाम आधारित प्रस्ताव प्रस्तुत करना होता है।

केंद्रीय मत्स्य पालन मंत्रालय के अनुसार, देश के 21 राज्यों में अब तक केज कल्चर के तहत 55,118 केज लगाए जा चुके हैं, जिन पर सरकार की ओर से 1,629 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई है। इनमें महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और झारखंड जैसे राज्य सबसे आगे हैं। देश में करीब 35 लाख हेक्टेयर जलाशयों में केज कल्चर तकनीक की मदद से मछली पालन की असीम संभावनाएं हैं। सरकार की योजनाएं और प्रोत्साहन इसे एक लाभकारी व्यवसाय में बदल रहे हैं, जो न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है, बल्कि युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए रास्ते भी खोल रहा है।

Exit mobile version