करनाल जिले में इन दिनों फिजी वायरस, जिसे बौना वायरस भी कहा जाता है, के प्रकोप से धान की फसल प्रभावित हो रही है। इस वायरस के कारण पौधों की बढ़वार रुक जाती है, पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है। कृषि विभाग की टीम द्वारा किए गए सर्वे में पता चला है कि जिले के 8 से 10 गांवों में लगभग 4,000 एकड़ में फिजी वायरस का प्रकोप देखा गया है, हालांकि इसका स्तर अलग-अलग है। इनमें से करीब 500 एकड़ में नुकसान का स्तर 25 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जबकि बाकी क्षेत्रों में 5 से 10 प्रतिशत नुकसान की संभावना जताई गई है।
कई किसान इस बीमारी से इतनी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं कि उन्होंने अपनी धान की फसल तक नष्ट कर दी है। वहीं, कई अन्य किसान दवाओं और अन्य उपायों का प्रयोग कर फसल को बचाने में जुटे हैं, जिससे उनकी लागत में बढ़ोतरी हो रही है। किसानों का कहना है कि इस अतिरिक्त खर्च और उत्पादन में कमी से उनकी आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है, ऐसे में सरकार से उचित मुआवजे की मांग की जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बीमारी वर्ष 2022 में भी देखी गई थी और समय पर उचित प्रबंधन से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। फिजी वायरस से प्रभावित पौधों को खेत से निकालकर नष्ट करना सबसे कारगर तरीका माना जा रहा है। जिन खेतों में यह वायरस पाया गया है, वहां 15 से 20 जून के बीच बोए गए धान की किस्मों – जैसे पीआर 14, 1509 और पीआर 114 में अधिक प्रकोप दर्ज किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि फिलहाल स्थिति गंभीर नहीं है और किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है। अगर किसान कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार कदम उठाते हैं तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

