नई दिल्ली: इस वर्ष देश में खाद सब्सिडी का बोझ लगभग बीस प्रतिशत तक बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी आपूर्ति बाधाओं के कारण वैश्विक स्तर पर खादों की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है। इसके चलते खाद उत्पादन की लागत भी बढ़ गई है, जिससे सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव बनने की आशंका है।
कीमतों में उछाल, लेकिन किसानों पर असर नहीं
अधिकारियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने के बावजूद देश में खादों के अधिकतम खुदरा मूल्य में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। सरकार अतिरिक्त सब्सिडी देकर इस बढ़ोतरी का बोझ स्वयं वहन करेगी। इसका मतलब है कि यूरिया, डाई अमोनियम फॉस्फेट और पोटाश जैसी प्रमुख खाद किसानों को मौजूदा दरों पर ही उपलब्ध होती रहेंगी, जिससे खेती की लागत नियंत्रित रहेगी।
सब्सिडी का बढ़ता दायरा
वर्ष 2026 के लिए खाद सब्सिडी का संशोधित अनुमान एक लाख छियासी हजार करोड़ रुपये कर दिया गया है, जबकि प्रारंभिक बजट में यह एक लाख इकहत्तर हजार करोड़ रुपये रखा गया था। वैश्विक कीमतों में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए यह स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि सरकार को अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है।
कीमतों में बढ़ोतरी की मुख्य वजह
खादों की कीमतों में यह तेजी मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में उत्पन्न हालात और प्रमुख समुद्री मार्गों में बाधा के कारण आई है। होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के प्रमुख व्यापारिक मार्गों में से एक है, जहां किसी भी प्रकार की रुकावट से आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होती है। भारत खादों और उनके कच्चे माल के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, जिससे अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का सीधा असर देश पर पड़ता है।
आयात पर निर्भरता बनी चुनौती
भारत अपनी डाई अमोनियम फॉस्फेट की लगभग साठ प्रतिशत आवश्यकता आयात से पूरी करता है, जबकि यूरिया और मिश्रित खाद की एक महत्वपूर्ण हिस्सेदारी भी आयात पर निर्भर है। इसके अलावा रॉक फॉस्फेट, फॉस्फोरिक अम्ल और पोटाश जैसे कच्चे पदार्थ भी विदेशों से ही आते हैं। इस वजह से वैश्विक बाजार में किसी भी उतार-चढ़ाव का असर देश के खाद क्षेत्र पर पड़ता है।
आपूर्ति बनाए रखने की तैयारी
आगामी खरीफ मौसम को ध्यान में रखते हुए कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े पैमाने पर खरीद की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत डाई अमोनियम फॉस्फेट, ट्रिपल सुपर फॉस्फेट और अमोनियम सल्फेट की बड़ी मात्रा में आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान में देश के पास पर्याप्त भंडार मौजूद है, लेकिन बढ़ती मांग को देखते हुए अतिरिक्त व्यवस्था की जा रही है।
किसानों और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
सरकार द्वारा सब्सिडी के माध्यम से लागत को नियंत्रित रखने का उद्देश्य किसानों की आय को सुरक्षित रखना और खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी को रोकना है। हालांकि आयात पर निर्भरता और वैश्विक आपूर्ति में अनिश्चितता के चलते आने वाले समय में सरकारी खजाने पर दबाव बढ़ सकता है। फिर भी फिलहाल किसानों को खाद की कीमतों में किसी प्रकार की बढ़ोतरी का सामना नहीं करना पड़ेगा, जिससे खेती की गतिविधियां प्रभावित नहीं होंगी।
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