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उत्तर प्रदेश में किसानों को मिलेगा गुणवत्तापूर्ण और सस्ता बीज, योगी सरकार बनाएगी 5 सीड पार्क

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के लिए योगी सरकार ने एक बड़ी पहल की है। राज्य सरकार अब बीज उत्पादन, प्रोसेसिंग और वितरण की पूरी श्रृंखला को प्रदेश के भीतर ही मजबूत करने जा रही है। इसके तहत राज्य के विभिन्न कृषि जलवायु क्षेत्रों में पांच अत्याधुनिक सीड पार्क स्थापित किए जाएंगे, जिससे न केवल किसानों को उत्तम गुणवत्ता वाले बीज मिलेंगे, बल्कि कृषि उत्पादकता में भी बड़ा इजाफा देखने को मिलेगा। बीज, फसल उत्पादन की नींव होता है। यदि बीज की गुणवत्ता खराब हो तो पूरी फसल प्रभावित होती है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। बीज का कम अंकुरण, या कंपनियों द्वारा घटिया बीज की बिक्री किसानों के लिए चिंता का विषय रहा है। 2023-24 में लिए गए 1.33 लाख बीज नमूनों में से 3,630 नमूने खराब पाए गए, जिससे किसानों की मेहनत और पूंजी दोनों पर पानी फिरा।

उत्तर प्रदेश जैसे कृषि प्रधान राज्य में जहां तीन करोड़ से अधिक परिवार खेती पर निर्भर हैं, वहां बीज की गुणवत्ता सीधे किसानों की आय और कृषि विकास से जुड़ी है। राज्य सरकार ने इस गंभीर समस्या को ध्यान में रखते हुए बीज उत्पादन को राज्य के भीतर ही बढ़ावा देने की योजना बनाई है। योगी सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत वेस्टर्न ज़ोन, तराई ज़ोन, सेंट्रल ज़ोन, बुंदेलखंड और ईस्टर्न ज़ोन में सीड पार्क बनाए जाएंगे। ये पार्क पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर स्थापित किए जाएंगे, जहां राज्य सरकार की ओर से भूमि व बुनियादी ढांचे की सुविधा दी जाएगी, जबकि निजी निवेशक अत्याधुनिक सुविधाओं का विकास करेंगे।

सीड पार्कों में बीज उत्पादन, प्रोसेसिंग, भंडारण, स्पीड ब्रीडिंग और हाईब्रिड बीजों के लिए लैब जैसी सुविधाएं होंगी। लखनऊ के अटारी क्षेत्र में पहले पार्क की स्थापना की जा रही है, जिसके लिए 130.63 एकड़ भूमि चिह्नित की गई है और 266.70 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। यहां 26 सीड ब्लॉक बनाए जाएंगे जिनमें विभिन्न फसलों के बीज तैयार किए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य इन पार्कों से 40,000 बीज उत्पादक किसानों को जोड़ना है। साथ ही एक पार्क से लगभग 1,200 लोगों को प्रत्यक्ष और 3,000 लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है। निवेशकों को भूमि 30 वर्षों के लिए लीज पर दी जाएगी, जिसे बाद में 90 वर्षों तक बढ़ाया जा सकता है।

फिलहाल उत्तर प्रदेश की लगभग 162 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि में हर साल 139.43 लाख क्विंटल बीज की जरूरत होती है। इनमें से 50 फीसदी बीज दक्षिण भारत के राज्यों जैसे तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश से आयात किए जाते हैं, जिस पर राज्य सरकार को करीब 3,000 करोड़ रुपये सालाना खर्च करने पड़ते हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में गेहूं के 20 प्रतिशत, धान के 51 प्रतिशत, मक्का के 74 प्रतिशत, जौ के 95 प्रतिशत, दलहन के 50 प्रतिशत और तिलहन के 52 प्रतिशत बीज बाहर से मंगाए जाते हैं। बीज पार्कों की स्थापना से यह निर्भरता कम होगी और बीज की गुणवत्ता में सुधार आने से प्रति हेक्टेयर उपज में 15-20 प्रतिशत तक का इजाफा संभव है।

उत्तर प्रदेश की भूमि और सिंचाई व्यवस्था देश में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है, फिर भी उपज के मामले में यह पंजाब, हरियाणा जैसे राज्यों से पीछे है। उदाहरण के लिए यूपी में गेहूं की उपज 26.75 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है, जबकि पंजाब में यह 40.35 क्विंटल है। इसी तरह धान की उपज 37.35 क्विंटल है, जबकि हरियाणा में 45.33 क्विंटल। इस अंतर को कम करने में गुणवत्ता वाले बीजों की भूमिका बेहद अहम है। ऐसे में योगी सरकार की यह योजना प्रदेश के कृषि विकास, किसानों की आमदनी और राज्य की अर्थव्यवस्था तीनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

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