पंजाब में पराली जलाने की समस्या से निपटने और किसानों को पर्यावरण के अनुकूल खेती के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से अमृतसर जिला प्रशासन ने एक नई पहल की शुरुआत की है। इस पहल के तहत अब उन किसानों को विशेष पहचान दी जाएगी जो पराली नहीं जलाते हैं। प्रशासन ने फैसला किया है कि ऐसे किसानों को ‘वरीयता कार्ड’ जारी किए जाएंगे। यह कार्ड किसानों को सरकारी कार्यालयों में प्राथमिकता सेवाएं दिलाने का माध्यम बनेंगे। जिला उपायुक्त साक्षी साहनी ने बताया कि इस कार्ड के माध्यम से किसान सेवा केंद्रों, फर्द केंद्रों और अन्य सरकारी विभागों में अपनी बारी का लंबा इंतजार किए बिना काम करवा सकेंगे। उन्हें सरकारी कार्यालयों में पार्किंग शुल्क से भी छूट दी जाएगी। इसके साथ ही, जिन गांवों ने सामूहिक रूप से पराली न जलाने की नीति को अपनाया है, उन्हें भी प्रशासन की ओर से आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। यह सहायता उन गांवों को प्रोत्साहित करने के लिए दी जाएगी जो पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार को अपनाते हैं।
प्रशासन ने इस दिशा में निजी कंपनियों के साथ मिलकर काम करना शुरू कर दिया है ताकि किसानों को पर्यावरण के अनुकूल कृषि उपकरणों पर विशेष छूट मिल सके। इसके अलावा, वरीयता कार्डधारी किसानों को सरकारी आयोजनों में विशेष आमंत्रण दिया जाएगा और उन्हें उपहार भी प्रदान किए जाएंगे। इस कदम का मुख्य उद्देश्य किसानों को पराली जलाने की बजाय टिकाऊ और वैज्ञानिक तरीके से खेती के लिए प्रोत्साहित करना है।
किसानों के साथ हुई एक बैठक में मुख्य कृषि अधिकारी बलजिंदर सिंह भुल्लर ने उन्हें सलाह दी कि वे सोशल मीडिया पर फैलाई जाने वाली अफवाहों से दूर रहें और कृषि विश्वविद्यालयों तथा सरकारी कृषि विभाग द्वारा दिए गए निर्देशों का ही पालन करें। उनका कहना था कि इस योजना से जिले में पर्यावरण सुधार के साथ-साथ कृषि समुदाय में स्थायित्व की भावना को भी बढ़ावा मिलेगा। हर साल सर्दियों में दिल्ली-एनसीआर में गंभीर वायु प्रदूषण देखा जाता है, जिसके लिए पराली जलाना एक बड़ा कारण माना जाता है। अमृतसर प्रशासन की यह पहल न केवल स्थानीय स्तर पर प्रदूषण को कम करेगी, बल्कि व्यापक तौर पर देश के वायुमंडलीय हालात में भी सुधार लाने में सहायक बन सकती है। यह प्रयास किसानों को सम्मान देने और उन्हें बदलाव का भागीदार बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

