पटना: बिहार सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि लागत घटाने के लिए लगातार नई योजनाएं शुरू कर रही है। इसी क्रम में राज्य के कृषि विभाग की पौधा संरक्षण इकाई ने वर्ष 2024-25 के लिए केला, पपीता, आम और लीची की फसलों में कीटनाशक छिड़काव के लिए एक सब्सिडी योजना शुरू की है। इस योजना का उद्देश्य किसानों को कम लागत में बेहतर फसल सुरक्षा देना और उनके उत्पादन को बढ़ावा देना है। इस योजना के तहत केला और पपीता की फसलों पर 50 फीसदी सब्सिडी दी जाएगी, जबकि आम और लीची के लिए 75 फीसदी सब्सिडी का प्रावधान है। इससे किसानों को न सिर्फ कीट प्रबंधन में मदद मिलेगी, बल्कि फलों की गुणवत्ता और उपज भी बेहतर होगी।
ऑनलाइन आवेदन की अनिवार्यता
किसानों को इस योजना का लाभ उठाने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य है। आवेदन बिहार कृषि विभाग के पोर्टल https://horticulture.bihar.gov.in पर किया जा सकता है। आवेदन की जांच और सत्यापन के बाद, संबंधित सेवा प्रदाता को खेतों में छिड़काव की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, जो निर्धारित समय पर किसानों की फसल में कीटनाशक का छिड़काव करेगा। यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी होगी।
कितनी मिलेगी सब्सिडी, क्या होगी लागत?
पपीता की फसल के लिए पहले स्प्रे में प्रति एकड़ 4300 रुपये की लागत आती है। इसमें किसानों को 2150 रुपये खुद वहन करने होंगे और शेष 50% सब्सिडी यानी 2150 रुपये सरकार देगी। दूसरे स्प्रे की लागत 4000 रुपये है, जिसमें किसानों को 2000 रुपये की सब्सिडी मिलेगी। सरकार का लक्ष्य है कि इस योजना के तहत 25 एकड़ पपीता फसल पर छिड़काव कराया जाए। केला की फसल के लिए खगड़िया जिले में 200 हेक्टेयर क्षेत्र को योजना में शामिल किया गया है। विशेष रूप से परबत्ता प्रखंड को केले की खेती का प्रमुख क्षेत्र मानते हुए वहां 50 प्रतिशत सब्सिडी पर कीटनाशक का छिड़काव कराया जाएगा। लीची के लिए, खगड़िया जिले के विभिन्न इलाकों में 1400 पौधों पर छिड़काव किया जाएगा। पहले छिड़काव में प्रति पौधा 216 रुपये की लागत आएगी, जिसमें से किसानों को सिर्फ 54 रुपये ही खर्च करने होंगे। बाकी 162 रुपये की सब्सिडी सरकार देगी। आम के पौधों पर भी बड़े स्तर पर छिड़काव की योजना है। कुल 7000 आम के पौधे इसके तहत आएंगे। पहले स्प्रे की लागत 76 रुपये प्रति पौधा निर्धारित की गई है, जिसमें सरकार 75 प्रतिशत यानी 57 रुपये की सब्सिडी देगी। शेष 19 रुपये किसान को देने होंगे। दूसरे स्प्रे की लागत 96 रुपये होगी, जिसमें 72 रुपये की सब्सिडी मिलेगी।
खगड़िया बन रहा है मॉडल जिला
खगड़िया जिला इस योजना में पायलट स्तर पर काम कर रहा है। यहां के परबत्ता, गोगरी और बेलदौर प्रखंड प्रमुखता से शामिल किए गए हैं। केला, पपीता, आम और लीची की खेती यहां बड़े पैमाने पर होती है। सरकार की योजना है कि इस मॉडल को अन्य जिलों में भी लागू किया जाए, ताकि पूरे राज्य के फल उत्पादक किसानों को इसका लाभ मिल सके।
सरकार का लक्ष्य: कम लागत में अधिक लाभ
राज्य सरकार की यह पहल न केवल किसानों को कीट प्रबंधन में तकनीकी मदद देगी, बल्कि कम लागत में उत्पादन बढ़ाकर उनकी आमदनी भी बढ़ाएगी। साथ ही, यह कदम बागवानी फसलों में गुणवत्ता सुधार और फसल की बेहतर मार्केट वैल्यू सुनिश्चित करेगा।
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि योजना को लेकर मांग लगातार बढ़ रही है और आने वाले महीनों में इसके तहत लाभान्वित किसानों की संख्या में काफी इजाफा होने की उम्मीद है। बिहार सरकार की यह योजना राज्य के किसानों को तकनीकी सहायता, सरकारी सब्सिडी और डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह योजना न केवल कीटनाशकों के खर्च को घटाएगी, बल्कि उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में वृद्धि कर किसानों को बाजार में बेहतर दाम दिलाने में भी मदद करेगी। खगड़िया जिले में इसकी सफलता के बाद इसे जल्द ही अन्य जिलों में भी लागू किया जा सकता है।

