नई दिल्ली: देशभर में कृषि क्षेत्र में एक नया बदलाव देखने को मिल रहा है। अब किसान पारंपरिक गेहूं, धान और गन्ना जैसी फसलों की जगह तेजी से सुगंधित पौधों यानी एरोमा क्रॉप्स की खेती की ओर रुख कर रहे हैं। इन पौधों से निकाले जाने वाले एसेंशियल ऑयल की घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग है, जिससे किसानों को कम जमीन और लागत में अधिक मुनाफा मिल रहा है। सरकार और वैज्ञानिक संस्थानों की मदद से यह क्षेत्र आने वाले वर्षों में ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने की क्षमता रखता है।
क्या हैं एसेंशियल ऑयल?
एसेंशियल ऑयल्स प्राकृतिक सुगंधित तेल होते हैं जो पुदीना, लेमनग्रास, तुलसी, पचौली, रोजमेरी, चंदन, खस, लौंग, इलायची, नीम, लैवेंडर जैसे पौधों से निकाले जाते हैं। इनका उपयोग कॉस्मेटिक्स, दवाइयों, खुशबूदार उत्पादों, अरोमा थेरेपी और मसाज ऑयल में होता है। इनकी कीमतें भी बेहद आकर्षक हैं – जैसे पचौली ऑयल 4,000-5,000 रुपये प्रति लीटर, लेमनग्रास 800-1,000 रुपये प्रति लीटर और तुलसी ऑयल 2,000-3,000 रुपये प्रति लीटर तक बिकता है।
कहां–कहां हो रही है खेती?
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में लेमनग्रास, तुलसी और मेंथा जैसी फसलों का बड़े पैमाने पर उत्पादन हो रहा है। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में करीब 5,000 एकड़ में मेंथा की खेती होती है। एक एकड़ से औसतन 40-50 किलो मेंथा ऑयल निकलता है, जिसकी बाजार कीमत 1,000-1,200 रुपये प्रति किलो होती है। यानी एक एकड़ में 40-60 हजार रुपये तक की कमाई संभव है। झारखंड के गढ़वा जिले में तुलसी और लेमनग्रास की खेती से किसान 1 एकड़ में एक लाख रुपये तक कमा रहे हैं। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में महिला स्वयं सहायता समूह लैवेंडर और तुलसी की खेती कर, स्वयं तेल निकालकर बाजार में बेच रही हैं।
सरकारी मदद और योजनाएं
किसानों को इस ओर प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने CSIR-CIMAP (लखनऊ), FRI (देहरादून) और AROMA Mission जैसे संस्थानों के माध्यम से प्रशिक्षण, पौध और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराना शुरू किया है।
AROMA Mission, जिसे ‘पर्पल रिवोल्यूशन’ भी कहा जाता है, खासकर लैवेंडर, रोजमेरी और लेमनग्रास जैसी फसलों को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया था। इन फसलों की खासियत यह है कि इन्हें ज्यादा पानी, रासायनिक खाद या कीटनाशक की आवश्यकता नहीं होती। लेमनग्रास, तुलसी और पचौली जैसे पौधे सूखे क्षेत्रों में भी अच्छे से उग जाते हैं, जिससे सिंचाई सीमित क्षेत्रों के किसानों को भी लाभ हो रहा है।
वैश्विक बाजार में भारत की बढ़ती पहचान
भारत अब दुनिया के सबसे बड़े एसेंशियल ऑयल उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल हो रहा है। यूरोप, अमेरिका, जापान और खाड़ी देशों में इनकी भारी मांग है। किसान अपने उत्पाद सीधे बाजार समितियों, कंपनियों, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और निर्यातकों को बेचकर बेहतर कीमत प्राप्त कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह रुझान जारी रहा तो आने वाले कुछ वर्षों में एरोमा क्रॉप्स खेती, ग्रामीण भारत में आर्थिक क्रांति का मजबूत स्तंभ बन सकती है।

