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‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ को लेकर किसानों में उत्साह, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सुनी किसानों की बात

देशभर में ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ को लेकर किसानों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य भारत की कृषि व्यवस्था को उन्नत बनाना, किसानों की आय को बढ़ाना और देश को आत्मनिर्भर कृषि क्षेत्र की दिशा में ले जाना है। इसी क्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के पीपराकोठी में किसानों से संवाद किया।

कार्यक्रम के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने पीपराकोठी की ऐतिहासिक धरती को नमन करते हुए कहा कि यह वही भूमि है जहां से महात्मा गांधी ने चंपारण सत्याग्रह की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा कि आज उसी धरती पर कृषि विज्ञान केंद्र जैसे संस्थान किसानों के भविष्य को संवारने में जुटे हैं, जो राष्ट्र निर्माण में गांधीजी के विचारों की ही एक आधुनिक अभिव्यक्ति है।

चौहान ने अपने संबोधन में खुद को किसानों का पहला सेवक बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के विजन को साकार करने के लिए ‘विकसित कृषि’ और ‘समृद्ध किसान’ अनिवार्य हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता से सुनती है और उन्हें हल करने के लिए गंभीर प्रयास कर रही है।

कार्यक्रम में लीची उत्पादक किसानों की एक बड़ी चिंता पर बात करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि लीची जल्दी खराब हो जाती है, जिससे किसानों को उचित दाम नहीं मिल पाता। इस समस्या को हल करने के लिए केंद्र सरकार कोल्ड स्टोरेज की संख्या बढ़ाने और लीची की ताजगी बनाए रखने के लिए नई तकनीकों पर शोध को प्रोत्साहित कर रही है।चौहान ने बिहार में मक्का उत्पादन में आए बदलाव की ओर ध्यान दिलाते हुए बताया कि राज्य में मक्का की उत्पादकता पहले प्रति हेक्टेयर 23-24 क्विंटल थी, जो अब बढ़कर 50-60 क्विंटल तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की इथेनॉल नीति ने मक्का की मांग और कीमत दोनों में इजाफा किया है, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिला है।

कृषि मंत्री ने चावल की दो नई किस्मों की जानकारी भी दी, जिनमें 20% कम पानी की आवश्यकता होती है और 30% अधिक पैदावार मिलती है। उन्होंने वैज्ञानिकों को निर्देश दिया कि वे और अधिक उन्नत बीजों पर काम करें, जिससे छोटे किसानों को भी बड़े लाभ मिल सकें।शिवराज सिंह चौहान ने छोटे किसानों के परिश्रम की प्रशंसा करते हुए कहा कि बिहार के किसान छोटे-छोटे खेतों से भी “सोना” उगा रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार की मिलकर चल रही योजनाएं बिहार को कृषि के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगी।

उन्होंने नकली कीटनाशकों पर सख्ती से कार्रवाई की बात दोहराते हुए कहा कि सरकार किसानों की फसल की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस प्रकार के अपराधों में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।

‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए चौहान ने बताया कि देशभर में 16,000 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोगशालाएं सक्रिय हैं। वैज्ञानिक गांव-गांव जाकर किसानों को आधुनिक तकनीकों से अवगत करा रहे हैं। यह अभियान ‘लैब से लैंड’ तक की यात्रा को साकार कर रहा है और कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला रहा है।

कार्यक्रम के अंत में उन्होंने “एक राष्ट्र – एक कृषि – एक टीम” का मंत्र देते हुए कहा कि अगर देश का अन्नदाता सुखी होगा तो देश खुद-ब-खुद समृद्ध होगा। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे सरकार के साथ मिलकर देश की कृषि व्यवस्था को विश्वस्तरीय बनाने में योगदान दें।इस दौरे ने न सिर्फ पूर्वी चंपारण के किसानों में नई ऊर्जा का संचार किया, बल्कि ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ को गांव-गांव तक पहुंचाने की दिशा में भी एक मजबूत संदेश दिया।

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