भोपाल: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गुरुवार को कृषि विभाग के एक कार्यशाला में किसान हेल्पलाइन और प्राथमिक कृषि ऋण समिति की सदस्यता बढ़ाने के लिए विशेष अभियान की शुरुआत की। इस दौरान एक दिलचस्प घटना सामने आई, जब मुख्यमंत्री ने स्वयं हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके उसकी कार्यप्रणाली को परखा।
बताया गया कि मुख्यमंत्री ने कॉल सेंटर से गर्मियों में उगाई जाने वाली तीसरी फसल के बारे में जानकारी लेनी चाही। इस पर कॉल सेंटर के कर्मचारी ने उनका नाम पूछा। जब मुख्यमंत्री ने खुद को किसान बताया, तो कर्मचारी ने कहा कि उनका मोबाइल नंबर दर्ज कर लिया गया है और संबंधित अधिकारी उनसे संपर्क करेगा।
हेल्पलाइन पर सवाल, विपक्ष का हमला
इस घटना के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस मामले को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि किसान हेल्पलाइन की सच्चाई तब सामने आ गई, जब मुख्यमंत्री ने खुद उस पर कॉल किया। पटवारी ने आरोप लगाया कि हेल्पलाइन पर मौजूद कर्मचारी को यह तक जानकारी नहीं थी कि गर्मियों में किसानों को कौन सी फसल उगानी चाहिए। उन्होंने इसे सरकार की व्यवस्था की बड़ी कमी बताते हुए कहा कि यह सेवा किसानों को सही मार्गदर्शन देने में असफल है।
उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि जिस तरह मुख्यमंत्री को खेती से जुड़ी बुनियादी जानकारी नहीं है, उसी तरह उनके अधिकारी भी जरूरी जानकारी से अनभिज्ञ हैं। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि जिस हेल्पलाइन की प्रशंसा हर मंच से की जाती थी, उसी पर पूछे गए सवाल का जवाब नहीं मिला।
सरकार का पक्ष और योजनाएं
इससे पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कृषि क्षेत्र में सुधार को लेकर सरकार की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कृषि वर्ष के तहत कृषि से जुड़े 16 विभागों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया है, जिससे किसानों को एकीकृत सेवाएं मिल सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती को लेकर समाज में बनी धारणाओं को बदलने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि अब किसान आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अपनी आय बढ़ा रहे हैं। खेती से निकलने वाले अवशेषों का उपयोग कर अतिरिक्त आमदनी प्राप्त की जा रही है और पशुओं के लिए चारा भी तैयार किया जा रहा है।
सिंचाई, समर्थन मूल्य और किसानों को लाभ
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में सिंचाई व्यवस्था में सुधार हुआ है। नहरों का विस्तार और बिजली की बेहतर उपलब्धता से किसान साल में कई फसलें उगा पा रहे हैं, जिसमें ग्रीष्मकालीन फसल भी शामिल है। उन्होंने बताया कि सरकार गेहूं की खरीद 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कर रही है, जिससे किसानों को लाभ मिल रहा है। इसके अलावा उड़द की खरीद पर 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने की भी घोषणा की गई है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी।
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