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नकली बायोस्टिमुलेंट्स पर लगेगा ब्रेक, शिवराज सिंह चौहान ने दिखाई सख्ती, बोले- किसानों के साथ नहीं होने दूंगा धोखा

shiv raj singh chauhan

नई दिल्ली: केंद्रीय कृषि, किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान इन दिनों कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता और किसानों के हक को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाए हुए हैं। खासतौर पर फसलों में इस्तेमाल हो रहे बायोस्टिमुलेंट्स को लेकर उन्होंने सवाल खड़े किए हैं और स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि ये उत्पाद किसानों को वास्तविक लाभ नहीं दे रहे, तो इनकी बिक्री पर रोक लगाई जाएगी। उनका साफ कहना है कि बाजार में अब वही बायोस्टिमुलेंट बिकेंगे, जो वास्तव में प्रभावी और प्रमाणित हों। मंगलवार को नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान उन्होंने कृषि मंत्रालय और आईसीएआर के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि देश का कृषि मंत्री होने के नाते वह यह हरगिज़ नहीं सहेंगे कि किसानों के साथ किसी प्रकार की बेईमानी या धोखाधड़ी हो।

बैठक के दौरान चौहान ने कुछ चौंकाने वाले आंकड़े भी सामने रखे। उन्होंने बताया कि कुछ साल पहले तक बाजार में करीब 30,000 बायोस्टिमुलेंट्स मौजूद थे, जिनकी गुणवत्ता और प्रभाव पर कोई ठोस निगरानी नहीं थी। उन्होंने कहा, “अफसर आंखें बंद करके यह सब देख रहे थे।” जब उन्होंने इस पर सख्ती दिखाई, तो इनकी संख्या घटकर महज 650 उत्पादों तक आ गई। मंत्री ने दो टूक कहा, “ऐसा तमाशा नहीं चलेगा, जिससे किसानों को नुकसान हो।”

बायोस्टिमुलेंट क्या है और खेती में क्या होती है इनकी भूमिका?

बायोस्टिमुलेंट्स जैविक या प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त ऐसे उत्पाद होते हैं जो पौधों की गुणवत्ता, वृद्धि और प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। ये न तो खाद (fertilizer) होते हैं और न ही कीटनाशक (pesticide), लेकिन फसलों की उत्पादकता में अप्रत्यक्ष रूप से अहम भूमिका निभाते हैं। ये उत्पाद पौधों की जड़ों के विकास को बढ़ावा देते हैं, जिससे वे मिट्टी से अधिक पोषक तत्व और पानी सोखने में सक्षम हो जाते हैं। इसके साथ ही ये फसल को सूखा, अधिक बारिश, खारापन या रोगों जैसे जैविक और जलवायु तनावों से निपटने में भी सहायक होते हैं। बायोस्टिमुलेंट्स प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया को बेहतर बनाकर पौधों में ऊर्जा उत्पादन की क्षमता को भी बढ़ाते हैं।

इसके आम उदाहरणों में सीवीड एक्सट्रैक्ट (समुद्री शैवाल का अर्क), ह्यूमिक और फुल्विक एसिड, एमिनो एसिड, और माइक्रोबियल बायोस्टिमुलेंट्स जैसे बैक्टीरिया या फफूंद आधारित उत्पाद शामिल हैं। हालांकि बायोस्टिमुलेंट्स का उद्देश्य खेती को अधिक टिकाऊ और जैविक बनाना है, लेकिन हाल के वर्षों में यह देखा गया है कि बाजार में गैर-परीक्षित, नकली या कम गुणवत्ता वाले उत्पादों की भरमार हो गई है। इससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है  न फसल बढ़ी, न लाभ मिला, बल्कि निवेश भी डूब गया। केंद्रीय कृषि मंत्री ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए यह संकेत दे दिया है कि अब इस गड़बड़ी पर कड़ी निगरानी और सख्त कार्रवाई होगी। उनका यह रुख न केवल नकली उत्पाद बनाने और बेचने वालों के खिलाफ सख्त संदेश है, बल्कि यह भी भरोसा दिलाता है कि केंद्र सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

शिवराज सिंह चौहान की यह पहल कृषि जगत में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे न सिर्फ किसानों का भरोसा बढ़ेगा बल्कि खेती में गुणवत्ता और पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी। अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में बायोस्टिमुलेंट्स की गुणवत्ता नियंत्रण के लिए कौन-कौन से नये मानक और निगरानी तंत्र लागू किए जाते हैं। लेकिन एक बात तय है – अब किसानों को धोखा देने वाले उत्पादों की बाजार में कोई जगह नहीं होगी।

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