नई दिल्ली: भारत सरकार ने सेकंड जेनरेशन (2G) इथेनॉल के निर्यात की मंजूरी दे दी है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 24 सितंबर को इसका नोटिफिकेशन जारी किया। इस फैसले से इथेनॉल बनाने वाली कंपनियों और मिलों को अतिरिक्त आमदनी का बड़ा अवसर मिलेगा। 2जी इथेनॉल के निर्यात मिली मंजूरी के बाद किसानों को भी फायदा होगा।
क्या है 2जी इथेनॉल?
2जी इथेनॉल को बनाने के लिए कृषि और औद्योगिक अपशिष्ट का इस्तेमाल होता है। इसमें खोई, लकड़ी का कचरा, धान-गेहूं का भूसा, मक्का, चारा, वुडी बायोमास, गैर-खाद्य फसलें (जैसे घास और शैवाल) और अन्य नवीकरणीय संसाधन शामिल हैं। इसे ईंधन और गैर-ईंधन दोनों क्षेत्रों में उपयोग किया जा सकता है। यह तकनीक गन्ने और अनाज से बनने वाले पारंपरिक इथेनॉल की तुलना में ज्यादा टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल मानी जाती है।
किसे होगा फायदा?
2जी इथेनॉल का निर्यात खुलने से उन कंपनियों को फायदा होगा जो बायोफ्यूल उत्पादन करती हैं। अभी तक इथेनॉल उत्पादन में चीनी मिलों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। सरकार इनसे इथेनॉल खरीदकर पेट्रोल में मिलाती रही है। लेकिन गन्ना और अनाजों पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए 2जी इथेनॉल को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस कदम से न केवल कंपनियों की आय बढ़ेगी बल्कि किसानों को भी परोक्ष लाभ मिलेगा।
सरकार की अपील और वैश्विक मांग
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने हाल ही में बायोफ्यूल कंपनियों से उत्पादन बढ़ाने की अपील की थी। उनका कहना था कि दुनिया में इथेनॉल की भारी मांग है और भारत इस मांग को पूरा कर सकता है। उन्होंने बताया कि भारत ने पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य समय से पहले पूरा किया है, जिससे पूरी दुनिया भारत की सराहना कर रही है और तकनीकी सहयोग चाह रही है।
इथेनॉल ब्लेंडिंग से घटेगा आयात खर्च
भारत सरकार ने पेट्रोल में 20% तक इथेनॉल मिलाने की मंजूरी दी है। इससे देश का ईंधन आयात बिल घट रहा है और प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिल रही है। इथेनॉल ब्लेंडिंग से गन्ना किसानों को भी फायदा हो रहा है क्योंकि उनकी पैदावार का बेहतर उपयोग हो रहा है। 2जी इथेनॉल के निर्यात की मंजूरी भारत की ऊर्जा नीति में बड़ा बदलाव साबित हो सकती है। इससे बायोफ्यूल सेक्टर को मजबूती मिलेगी, किसानों की आय बढ़ेगी और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान होगा।
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