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बिहार में मसाला खेती पर जोर: किसानों को मिल रही बंपर सब्सिडी, जानें कैसे उठाएं लाभ

masala farming

भारतीय मसालों की वैश्विक मांग बढ़ने के साथ ही किसानों का रुझान भी मसाला उत्पादन की ओर तेजी से बढ़ रहा है। मसालों की खेती कम लागत और बेहतर मुनाफे का जरिया बन रही है। इसी कड़ी में बिहार सरकार ने बीज मसाले योजना के तहत धनिया और मेथी की खेती को बढ़ावा देने की पहल की है। इस योजना के तहत किसानों को मसालों की खेती के लिए प्रति एकड़ ₹15,000 सब्सिडी दी जा रही है।

बिहार सरकार का उद्यानिकी विभाग मसालों के क्षेत्र विस्तार के लिए किसानों को जागरूक कर रहा है। इसके तहत किसानों को धनिया और मेथी की खेती से संबंधित तकनीकी जानकारी दी जा रही है। धनिया की खेती के लिए शुष्क और ठंडे जलवायु वाले क्षेत्र सबसे उपयुक्त हैं। खेत को 2-3 बार गहराई से जोतें और समतल करें। गोबर की खाद या जैविक खाद डालने से बेहतर उत्पादन होता है। बीजों को रगड़कर दो हिस्सों में बांटने के बाद ही बुवाई करें।

जबकि मेथी के लिए मिट्टी पलटने वाले हल से पहली जुताई करें और उसके बाद 2-3 बार हल्की जुताई करें। खेत में उचित नमी का होना अंकुरण के लिए जरूरी है। मैदानी क्षेत्रों में अक्टूबर-नवंबर, जबकि पहाड़ी इलाकों में मार्च-मई के बीच इसकी खेती करें।

  1. बिहार के किसान ऑनलाइन आवेदन के जरिए इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।
  2. horticulture.bihar.gov.in पर जाएं।
  3. होम पेज पर “योजना” के विकल्प पर क्लिक करें।
  4. “बीज मसाले योजना” पर जाकर धनिया और मेथी के लिए आवेदन करें।
  5. रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरें और मांगी गई जानकारी सही-सही दर्ज करें।
  6. आवेदन सबमिट करने के बाद रसीद संभालकर रखें।

यदि आप योजना से संबंधित अधिक जानकारी चाहते हैं, तो अपने जिले के कृषि या बागवानी विभाग के कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। किसानों के लिए सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर भी विस्तृत जानकारी उपलब्ध है। बिहार सरकार धनिया और मेथी की खेती को प्रोत्साहन देकर किसानों की आमदनी बढ़ाने और मसालों के क्षेत्र में राज्य को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। यह योजना न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगी, बल्कि बाजार में भारतीय मसालों की प्रतिस्पर्धा भी बढ़ाएगी।

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