नई दिल्ली: साल 2026 में अल नीनो (El Niño) के सक्रिय होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे भारत समेत कई देशों में गर्मी और सूखे जैसे हालात बन सकते हैं। ऑस्ट्रेलिया के ब्यूरो ऑफ मेट्रोलॉजी (BoM) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक अल नीनो के जून महीने से एक्टिव होने के संकेत मिल रहे हैं। इससे पहले मई तक इसके सक्रिय होने का पूर्वानुमान लगाना मुश्किल बताया गया है।
जून से बन सकती है अल नीनो की स्थिति
BoM ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि उसके मॉडल के अनुसार ट्रॉपिकल पैसिफिक महासागर में समुद्र की सतह का तापमान फरवरी के अंत तक ENSO की सामान्य स्थिति में लौट सकता है। मार्च से मई तक यह स्थिति सामान्य बनी रहने की संभावना है। इसके बाद ही अल नीनो की गतिविधियों में बदलाव देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार अगर अल नीनो आता है, तो उसकी वास्तविक सक्रियता जून के बाद ही स्पष्ट होगी।
भारत में क्या हो सकता है असर
भले ही अभी जनवरी का महीना चल रहा हो और देश के कई हिस्सों में सर्दी बनी हुई हो, लेकिन तेलंगाना जैसे राज्यों में गर्मी को लेकर अलार्म बजने लगा है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि 2026 में यहां तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है। संकेत मिल रहे हैं कि आने वाली गर्मी 2023 की भीषण गर्मी से ज्यादा गंभीर हो सकती है।
मौसम विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अल नीनो पहले भी तीन साल पहले खराब मौसम के लिए जिम्मेदार रहा है और इस बार भी इसके कारण गर्मी बढ़ने और मौसम में अस्थिरता आने की आशंका है। दक्षिण भारत के साथ-साथ उत्तर और मध्य भारत में भी अल नीनो का असर दिख सकता है।
IMD का संकेत, 2026 हो सकता है ज्यादा गर्म
भारतीय मौसम विभाग (IMD) पहले ही संकेत दे चुका है कि अल नीनो के असर के चलते 2026 की गर्मियां सामान्य से अधिक गर्म हो सकती हैं। IMD अधिकारियों का कहना है कि 2026 का साल 2025 की तुलना में ज्यादा गर्म रहने की संभावना है, जिससे जल संकट और कृषि पर दबाव बढ़ सकता है।
अल नीनो और ला नीना का चक्र
अल नीनो और ला नीना दोनों ही ENSO (El Niño Southern Oscillation) चक्र का हिस्सा हैं। ENSO का यह चक्र हर एक से तीन साल में बदलता रहता है।
- ला नीना को कूल फेज माना जाता है, जिससे ठंड और कुछ क्षेत्रों में अधिक बारिश या बर्फबारी होती है।
- अल नीनो को वॉर्म फेज कहा जाता है, जिससे तापमान बढ़ता है और सूखे की स्थिति बनती है।
फिलहाल ENSO ला नीना की स्थिति में है, लेकिन 2026 की गर्मियों तक अल नीनो की ओर झुकाव के संकेत मिल रहे हैं।
सूखा और वैश्विक असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अल नीनो उम्मीद के मुताबिक विकसित होता है, तो इसका असर 2026 के आखिर तक ज्यादा स्पष्ट होगा। इससे भारत में गर्मी बढ़ने के साथ-साथ सूखे जैसे हालात बन सकते हैं, जैसा कि 2023 में देखने को मिला था। उत्तरी अमेरिका और अन्य क्षेत्रों के मौसम पैटर्न पर भी इसका असर साफ दिखाई दे सकता है।
तूफान के मौसम पर भी पड़ेगा असर
अल नीनो का प्रभाव गर्मियों और पतझड़ के मौसम में महसूस होना शुरू हो सकता है। इसका एक बड़ा असर तूफानों के मौसम पर भी पड़ता है। हालांकि अभी यह बताना जल्दबाजी होगी कि तूफानों की संख्या कितनी होगी, लेकिन सामान्य तौर पर अल नीनो के दौरान कुछ क्षेत्रों में तूफानों की संख्या और दिशा में बदलाव देखने को मिलता है।
कुल मिलाकर, 2026 में अल नीनो के सक्रिय होने की आशंका ने मौसम वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी है। आने वाले महीनों में ENSO की स्थिति पर करीबी नजर रखी जाएगी, क्योंकि इसका सीधा असर भारत के मौसम, खेती और जल संसाधनों पर पड़ सकता है।
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