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अल नीनो असर से मॉनसून कमजोर, 111 जिलों पर विशेष निगरानी

El Nino impact India

नई दिल्ली: देश के कई हिस्सों में अभी भी मानसून की दस्तक का इंतजार जारी है। इस बीच सक्रिय अल नीनो के असर और कम बारिश की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने खेती की तैयारियों की समीक्षा तेज कर दी है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उच्चस्तरीय बैठक कर संभावित प्रभावित क्षेत्रों पर विशेष निगरानी के निर्देश दिए हैं। कृषि मंत्रालय ने बताया कि स्थिति की लगातार समीक्षा की जा रही है और विशेष निगरानी तंत्र सक्रिय कर दिया गया है।

111 जिलों को उच्च प्राथमिकता में रखा गया

सरकार के आकलन के अनुसार देश के 315 जिलों में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है। इनमें से 111 जिलों को उच्च प्राथमिकता की श्रेणी में रखा गया है, जहां सिंचाई की सुविधा करीब 25 प्रतिशत तक ही उपलब्ध है। अल नीनो की वजह से इन क्षेत्रों में फसल प्रभावित होने की आशंका अधिक है।

कई राज्यों पर ज्यादा असर की आशंका

अल नीनो के कारण मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश सहित 12 राज्यों में बारिश की कमी का असर अधिक देखने को मिल सकता है। अब तक हुई वर्षा में करीब 43 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जिससे खरीफ सीजन की तैयारियों पर भी असर पड़ रहा है।

संवेदनशील जिलों के लिए विशेष योजना

कृषि मंत्री ने राज्यों को निर्देश दिया है कि योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें समय पर जमीन पर लागू करें। जिला स्तर पर कृषि आकस्मिकता योजना को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अपडेट कर लागू करने को कहा गया है, ताकि कम बारिश की स्थिति में नुकसान को कम किया जा सके।

जल संरक्षण और फसल बदलाव पर जोर

बैठक में जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। तालाब, चेक डैम और खेत तालाब जैसी संरचनाओं को मजबूत करने और जल संचयन कार्यों को तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। किसानों को कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को अपनाने और फसल विविधीकरण बढ़ाने की सलाह दी गई है।

बीज, खाद और बाजार व्यवस्था पर तैयारी

सरकार ने बीज, उर्वरक और अन्य कृषि आवश्यकताओं की अग्रिम उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही बाजार में कीमतों पर नजर रखने और जमाखोरी रोकने के उपाय किए जा रहे हैं, ताकि आपूर्ति पर कोई असर न पड़े।

किसानों को समय पर सलाह

कृषि विज्ञान केंद्रों और मौसम इकाइयों के माध्यम से किसानों तक समय पर जानकारी पहुंचाई जाएगी। किसानों से अपील की गई है कि पर्याप्त वर्षा होने से पहले जल्दबाजी में बुवाई न करें और मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए निर्णय लें।

पशुधन और खाद्य सुरक्षा पर नजर

सरकार ने फसल बीमा, किसान ऋण और आय सहायता योजनाओं को किसानों के लिए सुरक्षा कवच बताया है। संभावित चारा संकट को देखते हुए राज्यों को अग्रिम तैयारी के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही सरकार ने भरोसा दिलाया है कि खाद्य सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ने दिया जाएगा।

मध्य प्रदेश में बुवाई पर असर

मध्य प्रदेश में अभी खरीफ बुवाई बड़े स्तर पर शुरू नहीं हो पाई है। ऐसे में आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी। सरकार का विशेष ध्यान उन क्षेत्रों पर है, जहां सिंचाई की सुविधा सीमित है और खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर है।

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