नई दिल्ली: देश के किसानों को अब अपनी उपज की उचित कीमत पाने के लिए न तो लंबी कतारों में लगने की आवश्यकता है और न ही बिचौलियों के रहमोकरम पर निर्भर रहने की। नैफेड द्वारा विकसित ई-समृद्धि पोर्टल किसानों के लिए एक बड़ी सुविधा बनकर सामने आया है। यह एक ऐसा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है, जो किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी पर सीधे फसल बेचने की सुविधा देता है – वह भी बिना किसी बिचौलिए के हस्तक्षेप के। ई-समृद्धि पोर्टल को किसानों के अनुकूल डिज़ाइन किया गया है, ताकि वे अपनी उपज को ऑनलाइन पंजीकरण के बाद नैफेड को सीधे बेच सकें। इस पोर्टल पर किसान अपनी उपज, जैसे उड़द, मूंग, तुअर, चना, मसूर, सोयाबीन, सरसों जैसी अधिसूचित फसलों को बेच सकते हैं। यह पोर्टल किसानों को सीधे भुगतान की गारंटी देता है, जो उनके बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से किया जाता है।
नैफेड ने वर्ष 2017 में इस प्लेटफॉर्म की शुरुआत की थी और जनवरी 2024 में इसका संस्करण-2 लांच किया गया। इसके जरिए अब तक देशभर के 70 लाख से अधिक किसान रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं और 1.27 करोड़ मीट्रिक टन से ज्यादा फसलों की खरीद हो चुकी है। नैफेड की ओर से किसानों को अब तक 59,390 करोड़ रुपये की राशि सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है। ई-समृद्धि पोर्टल की एक और खासियत यह है कि यह बहुभाषी प्लेटफॉर्म है, जो हिंदी, अंग्रेज़ी, गुजराती, कन्नड़ और मराठी जैसी भाषाओं में उपलब्ध है। किसानों की सुविधा के लिए व्हाट्सएप सेवा को भी पोर्टल से जोड़ा गया है, ताकि पंजीकरण से लेकर भुगतान तक की स्थिति का अपडेट सीधे किसानों तक पहुंच सके। साथ ही, किसानों को एसएमएस के माध्यम से भी हर ज़रूरी सूचना दी जाती है।
रजिस्ट्रेशन के समय किसानों को आधार नंबर, बैंक खाता जानकारी और फसल संबंधी विवरण देना होता है। भविष्य में बायोमेट्रिक सत्यापन की योजना भी तैयार की गई है, ताकि फर्जीवाड़े से बचा जा सके। नैफेड द्वारा हर बोरे पर लगाए गए क्यूआर कोड से फसल की पूरी जानकारी डिजिटल रूप से ट्रैक की जा सकती है। इस पोर्टल के माध्यम से अब किसानों से 100 प्रतिशत तक फसलों की खरीद की जा रही है। पहले यह आंकड़ा केवल 25 प्रतिशत तक सीमित था। इस बदलाव से विशेष रूप से दलहन और तिलहन की खेती करने वाले किसानों को बड़ा लाभ मिल रहा है। ई-समृद्धि पोर्टल किसानों के लिए केवल एक डिजिटल मंच नहीं, बल्कि उनकी आर्थिक आज़ादी की दिशा में एक अहम पहल है। यह न केवल उन्हें बिचौलियों से मुक्त करता है, बल्कि पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से सही दाम और समय पर भुगतान की गारंटी भी देता है। अब किसान अपनी उपज की बिक्री से लेकर भुगतान तक की प्रक्रिया को स्वयं नियंत्रित कर सकते हैं – पूरी तरह सुरक्षित और सरकारी निगरानी के तहत।

