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महाराष्ट्र के 18 जिलों में सूखे जैसे हालात, सरकार कराएगी सर्वेक्षण

Drought-like conditions in 18 districts of Maharashtra

मुंबई: महाराष्ट्र के 18 जिलों में कम बारिश के कारण सूखे जैसे हालात पैदा हो गए हैं। राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने सोमवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रभावित जिलों से जुड़ी रिपोर्ट मंगलवार को राज्य मंत्रिमंडल के सामने रखी जाएगी। सरकार को उम्मीद है कि अगले आठ से दस दिनों में अच्छी बारिश होने से राज्य के कई हिस्सों में स्थिति में सुधार हो सकता है। राजस्व मंत्री के अनुसार, उन्हें 18 जिलों में बारिश की कमी और खराब स्थिति से संबंधित आंकड़े प्राप्त हुए हैं। इन जिलों को फिलहाल विशेष रूप से प्रभावित माना गया है। सरकार की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति समझने के लिए व्यापक सर्वेक्षण कराने के निर्देश दिए गए हैं।

महाराष्ट्र में करीब आधे किसान प्रभावित

चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि महाराष्ट्र के करीब आधे किसान इस समय कम बारिश के कारण सूखे जैसे हालात का सामना कर रहे हैं। बारिश की कमी का असर खेती और पानी की उपलब्धता पर पड़ रहा है।

अगले आठ से दस दिनों में बारिश की उम्मीद

राजस्व मंत्री ने उम्मीद जताई कि अगले आठ से दस दिनों में राज्य में अच्छी बारिश हो सकती है। यदि इस अवधि में पर्याप्त बारिश होती है तो जल संकट और सूखे जैसी स्थिति में काफी कमी आ सकती है। उन्होंने बताया कि रविवार को राज्य के कुछ हिस्सों में बारिश हुई है। गणेश उत्सव के दौरान भी अच्छी बारिश होने की उम्मीद है। इससे जल स्रोतों में पानी बढ़ने और किसानों को राहत मिलने की संभावना है।

प्रभावित जिलों में दोबारा कराया जा रहा सर्वेक्षण

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में बारिश और सूखे की स्थिति का व्यापक आकलन कराने के निर्देश दिए हैं। जिला कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा गया है।

बारिश वाले क्षेत्रों की भी होगी जांच

जिन जिलों में हाल के दिनों में अच्छी बारिश हुई है, वहां भी स्थिति का दोबारा आकलन करने के लिए नए सर्वेक्षण कराए जा रहे हैं। सरकार यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बारिश के बाद जल उपलब्धता और खेती की स्थिति में कितना सुधार हुआ है। प्रभावित जिलों की रिपोर्ट मंगलवार को राज्य मंत्रिमंडल के सामने रखी जाएगी। इसके आधार पर सरकार आगे की राहत और सहायता व्यवस्था को लेकर निर्णय ले सकती है।

राजस्व विभाग से जुड़े 107 फैसलों का दावा

चंद्रशेखर बावनकुले ने बताया कि देवेंद्र फडणवीस सरकार के कार्यकाल में राजस्व विभाग से जुड़े 107 मंत्रिमंडलीय फैसले लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन फैसलों का उद्देश्य किसानों, कृषि मजदूरों और आम नागरिकों की संपत्ति तथा अधिकारों की सुरक्षा करना है।

संपत्ति और अधिकारों की सुरक्षा पर जोर

राजस्व मंत्री के अनुसार, तलाठी से लेकर जिला कलेक्टर तक राजस्व विभाग के अधिकारी लोगों की संपत्ति को सुरक्षित रखने और उनके अधिकारों को बरकरार रखने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार भूमि और संपत्ति से जुड़े मामलों में नागरिकों को अधिक स्पष्ट अधिकार देने की दिशा में भी काम कर रही है।

पांच साल में खेतों तक सड़क पहुंचाने का लक्ष्य

राजस्व मंत्री ने सरकार की मुख्यमंत्री बलिराजा शेत रास्ते योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत अगले पांच वर्षों में किसानों के खेतों तक सड़क पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

खेतों तक सड़क बनाने की जिम्मेदारी सरकार की

सरकार इन सड़कों के निर्माण की जिम्मेदारी स्वयं उठाएगी। खेतों तक सड़क पहुंचने से किसानों को कृषि कार्यों के दौरान आने-जाने में सुविधा मिलेगी। साथ ही फसल और कृषि सामग्री के परिवहन में भी आसानी होने की उम्मीद है।

जमीन के स्पष्ट मालिकाना हक के लिए नया कानून

राजस्व मंत्री ने बताया कि सरकार जल्द ही दो से तीन महत्वपूर्ण कानून लाने की तैयारी कर रही है। इनमें भूमि स्वामित्व से संबंधित कानून भी शामिल है।

नागरिकों को स्पष्ट स्वामित्व देने की योजना

बावनकुले के अनुसार, प्रस्तावित कानून के तहत नागरिकों को संपत्ति के निश्चित और स्पष्ट स्वामित्व वाले संपत्ति पत्र उपलब्ध कराने की योजना है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में सात-बारह उतारे, पंजीकरण दस्तावेज और विक्रय विलेख जैसे दस्तावेज संपत्ति के मालिकाना हक का रिकॉर्ड स्थापित करते हैं। सरकार अब लोगों को उनकी जमीन पर अधिक निश्चित और स्पष्ट स्वामित्व का अधिकार देने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है। इससे जमीन के मालिकाना हक को लेकर पैदा होने वाले विवादों को कम करने में मदद मिल सकती है।

पैमाइश के बाद ही संपत्ति पंजीकरण का प्रस्ताव

राजस्व मंत्री ने संपत्ति विवादों को रोकने के लिए एक अन्य प्रस्तावित कानून की भी जानकारी दी। इसके तहत पहले जमीन की पैमाइश कराने और उसके बाद ही संपत्ति का पंजीकरण करने की व्यवस्था प्रस्तावित है।

जमीन की सीमाओं से जुड़े विवाद कम करने की कोशिश

बावनकुले के मुताबिक, इस व्यवस्था से जमीन की वास्तविक सीमाओं और मालिकाना हक को लेकर होने वाले विवादों को कम करने में मदद मिल सकती है। भूमि की पैमाइश पहले होने से पंजीकरण के समय संपत्ति की स्थिति और सीमा को लेकर अधिक स्पष्टता रहने की उम्मीद है।

गणेश उत्सव में आंदोलन नहीं करने की अपील

राजस्व मंत्री ने गणेश उत्सव के दस दिनों के दौरान सभी राजनीतिक दलों और आम लोगों से आंदोलन नहीं करने की अपील की है। उनकी यह अपील मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे की ओर से 19 सितंबर से मुंबई के आजाद मैदान में प्रस्तावित अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की घोषणा के बीच आई है।

उत्सव के दौरान एकता बनाए रखने की अपील

बावनकुले ने कहा कि गणेश उत्सव के दौरान राज्य में किसी तरह का आंदोलन नहीं होना चाहिए। उन्होंने सभी लोगों से एकता बनाए रखने और ऐसे किसी भी घटनाक्रम से बचने का आग्रह किया, जिससे महाराष्ट्र, समाज या किसी व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचे। उन्होंने कहा कि गणेश उत्सव का दस दिवसीय पर्व खुशी, उत्साह और एकता का संदेश देने वाला होना चाहिए। इस दौरान लोगों को अपने स्वास्थ्य और महाराष्ट्र के विकास के लिए संकल्प लेना चाहिए।

इस वर्ष गणेश उत्सव 14 सितंबर से शुरू हुआ है और अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को होगी। ऐसे में राज्य सरकार की नजर एक ओर बारिश की स्थिति और सूखे जैसे हालात से प्रभावित किसानों पर है, वहीं दूसरी ओर भूमि सुधार और संपत्ति अधिकारों से जुड़े प्रस्तावित कानूनों को आगे बढ़ाने की तैयारी भी चल रही है।

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