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देसी गाय की पहचान कैसे करें, जानिए प्रमुख नस्लों की खासियत

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नई दिल्ली: दूध और घी की गुणवत्ता को लेकर आजकल देसी नस्ल की गायों की मांग तेजी से बढ़ रही है। खासकर ए2 प्रकार के दूध के कारण देसी गायों का महत्व और बढ़ गया है। यही वजह है कि किसान और पशुपालक शुद्ध देसी नस्ल की गाय खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं। लेकिन सही पहचान न होने के कारण कई बार गलत नस्ल की गाय खरीद ली जाती है। ऐसे में सही जानकारी बेहद जरूरी हो जाती है।

देसी नस्लों की संख्या में बढ़ोतरी

हाल ही में कृषि मंत्रालय ने गायों की 10 नई नस्लों को पंजीकृत किया है, जिससे अब कुल पंजीकृत नस्लों की संख्या बढ़कर 51 हो गई है। नई सूची में पोडा थुरुपू, नारी, डागरी, थूथो, श्वेता कपिला, हिमाचली पहाड़ी, पूर्णिया, कथानी, सांचौरी और मासिलुम जैसी नस्लें शामिल हैं। इसके अलावा गिर, साहीवाल, रेड सिंधी और थारपारकर जैसी प्रमुख नस्लें पहले से ही लोकप्रिय हैं।

प्रमुख देसी नस्लों की पहचान

गाय खरीदते समय उसकी नस्ल की पहचान करना बेहद जरूरी है। गिर नस्ल की गाय के कान लंबे और लटके हुए होते हैं, आंखें काली और सींग फैले हुए होते हैं। साहीवाल गाय का रंग लाल या भूरा होता है और यह अच्छी दूध उत्पादन के लिए जानी जाती है।

राठी गाय भूरे, सफेद और लाल रंग के धब्बों वाली होती है, जबकि नागोरी गाय की थूथन, सींग और खुर काले रंग के होते हैं। थारपारकर गाय के कान के अंदर का रंग पीला होता है और यह भी दूध उत्पादन में अच्छी मानी जाती है।

हरियाणवी गाय आमतौर पर सफेद या भूरे रंग की होती है और इसका चेहरा संकरा तथा सींग बड़े होते हैं। कांकरेज गाय के बड़े और मजबूत सींग इसकी पहचान होते हैं। बद्री गाय विभिन्न रंगों में पाई जाती है और पहाड़ी क्षेत्रों में अधिक पाई जाती है।

छोटी लेकिन खास नस्लें भी लोकप्रिय

पुंगनुर गाय कद में बहुत छोटी होती है, लेकिन यह प्रतिदिन तीन से पांच लीटर तक दूध दे सकती है। वहीं लाल सिंधी गाय पूरी तरह लाल रंग की होती है और इसकी नाक भी लाल होती है। यह नस्ल भी दूध उत्पादन के लिए जानी जाती है।

खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान

विशेषज्ञों के अनुसार गाय खरीदते समय उसके शरीर की बनावट, रंग, सींग, कान और दूध देने की क्षमता पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही विश्वसनीय स्रोत से ही खरीदारी करनी चाहिए और यदि संभव हो तो पशु चिकित्सक की सलाह जरूर लेनी चाहिए। सही नस्ल की पहचान से ही पशुपालकों को अधिक लाभ मिल सकता है और बेहतर गुणवत्ता का दूध प्राप्त किया जा सकता है।

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